दिल्ली सल्तनत, राजवंश, प्रशासन व स्थापत्य
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06 Jul 2026
Indian GK
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित अरब-तुर्क आक्रमण (गजनवी, गोरी) तथा दिल्ली सल्तनत के सभी राजवंशों, प्रशासनिक शब्दावली, बाजार नियंत्रण एवं स्थापत्य कला के विस्तृत नोट्स।
Table of Contents
- भाग 1: भारत पर अरब-तुर्क आक्रमण एवं प्रारंभिक राजवंश
- भाग 2: दिल्ली सल्तनत के प्रमुख राजवंश (1206 ई. — 1526 ई.)
- 1. गुलाम वंश (1206-1290 ई.)
- 2. खिलजी वंश (1290-1320 ई.)
- 3. तुगलक वंश (1320-1414 ई.)
- 4. सैयद वंश व लोदी वंश (1414-1526 ई.)
- भाग 3: सल्तनत कालीन प्रशासनिक, आर्थिक व स्थापत्य व्यवस्था
- 1. महत्वपूर्ण प्रशासनिक विभाग एवं अधिकारी
- 2. सल्तनत काल के प्रमुख कर (Taxes)
- 3. प्रमुख नगर एवं उनके संस्थापक
- 4. सल्तनत कालीन प्रमुख स्थापत्य एवं साहित्य
Key Points
- भारत में पहली बार जजिया कर की वसूली 712 ई. में सिंध विजय के दौरान मोहम्मद-बिन-कासिम द्वारा की गई थी.
- सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला इतिहास का प्रथम तुर्क मुस्लिम शासक सुबुक्तगीन का पुत्र महमूद गजनवी था.
- मोहम्मद गोरी के सिक्कों पर एक तरफ शिव व नंदी बैल की आकृति तथा दूसरी तरफ हिन्दू देवी लक्ष्मी की आकृति अंकित रहती थी.
- इल्तुतमिश ने चालीस गुलाम सरदारों का एक विशेष गुट 'तुर्कान-ए-चहलगानी' बनाया तथा सल्तनत में इक्ता प्रणाली की शुरुआत की.
- अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नकद वेतन देने की प्रथा शुरू की तथा बाजार नियंत्रण के लिए 'दीवान-ए-रियासत' विभाग बनाया.
- मोहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिए 'अमीर-ए-कोही' विभाग बनाया तथा इसके काल में प्रसिद्ध अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता भारत आया था.
- सिकन्दर लोदी ने 1504 ई. में आगरा शहर की स्थापना की तथा वह फारसी में 'गुलरूखी' उपनाम से कविताएं लिखता था.
भाग 1: भारत पर अरब-तुर्क आक्रमण एवं प्रारंभिक राजवंश
भारत पर अरबों के आक्रमण की पर्याप्त सूचना 9वीं शताब्दी के विद्वान बिलादुरी रचित पुस्तक 'फुतूह-अल बलदान' एवं 13वीं शताब्दी में अलीअहमद द्वारा रचित पुस्तक 'चचनामा' से मिलती है।
- मोहम्मद-बिन-कासिम (712 ई.) — इसने सिंध के शासक दाहिर को पराजित कर देबल पर अधिकार किया। भारत में पहली बार 'जजिया' नामक कर की वसूली इसी के द्वारा की गई थी।
- महमूद गजनवी के आक्रमण — सुबुक्तगीन का पुत्र महमूद गजनवी सीस्तान के खलीफा को हराकर 'सुलतान' की उपाधि धारण करने वाला प्रथम मुस्लिम शासक था। इसने भारत पर 1000-1026 ई. तक 17 बार आक्रमण किए (हेनरी इलियट के अनुसार)। इसका सबसे चर्चित आक्रमण 1026 ई. में सोमनाथ मंदिर (गुजरात) पर हुआ। इसके सिक्कों के पृष्ठ भाग पर कलमा का संस्कृत रूपांतरण 'अव्यमेकं अवतार' अंकित था। इसके दरबार में अलबरूनी, फिरदौसी, उत्बी तथा फारूखी रहते थे।
- मोहम्मद गोरी के आक्रमण — इसने सर्वप्रथम 1175 ई. में गोमल दर्रे से भारत में प्रवेश किया। 1178 ई. में गुजरात के बघेल शासक मूलराज द्वितीय (भीमदेव द्वितीय) से आबू पर्वत के नजदीक यह पराजित हुआ। पृथ्वीराज चौहान के साथ तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.) में गोरी पराजित हुआ तथा तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में गोरी विजयी हुआ। 1194 ई. में चंदावर के युद्ध में इसने कन्नौज नरेश जयचन्द को पराजित किया। इसके सिक्कों पर एक तरफ शिव व नंदी बैल की आकृति तथा दूसरी तरफ लक्ष्मी की आकृति (देहलीवाल सिक्का) अंकित रहती थी।
भाग 2: दिल्ली सल्तनत के प्रमुख राजवंश (1206 ई. — 1526 ई.)
दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत मुख्य रूप से पांच राजवंशों ने शासन किया, जिनका प्रशासनिक विवरण नीचे क्रमानुसार दिया गया है:
1. गुलाम वंश (1206-1290 ई.)
- कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-10 ई.) — यह गोरी का गुलाम था, जिसने लाहौर को राजधानी बनाया। इसे अपनी उदारता के कारण 'लाखबख्श' कहा जाता था। इसकी मृत्यु 1210 ई. में चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिरकर हुई। इसके सहायक बख्तियार खिलजी ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त किया था।
- इल्तुतमिश (1211-36 ई.) — इसे तुर्किस्तान का इल्बरी तुर्क कहा जाता है, जिसने चालीस गुलाम सरदारों का एक गुट 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीसा) बनाया। इसने 'इक्ता व्यवस्था' तथा चाँदी का टंका (175 ग्रेन) एवं तांबे का जीतल सिक्का चलाया। 1229 में बगदाद के खलीफा से इसे 'सुलतान-ए-आजम' की उपाधि मिली।
- रजिया बेगम (1236-40 ई.) — यह प्रथम मुस्लिम महिला शासिका थी, जिसने पर्दाप्रथा त्यागकर पुरुषों की भांति कुबा (कोट) एवं कुलाह (टोपी) पहनकर दरबार में बैठना शुरू किया। इसने मलिक जलालुद्दीन याकूत को 'अमीर-ए-आखुर' (अश्वशाला का प्रधान) नियुक्त किया था। कैथल के पास डाकुओं द्वारा इसकी हत्या की गई।
- बलबन (1266-87 ई.) — इसका वास्तविक नाम बहाउद्दीन था। इसने चालीसा दल (तुर्कान-ए-चहलगानी) का विनाश किया। दरबार में 'सिजदा एवं पाबोस' प्रथा तथा फारसी रीति-रिवाज पर आधारित 'नवरोज उत्सव' की शुरुआत की। अपने विरोधियों के प्रति इसने 'लौह एवं रक्त' की नीति का पालन किया। इसके दरबार में प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो एवं अमीर हसन रहते थे।
2. खिलजी वंश (1290-1320 ई.)
- जलाउद्दीन फिरोज खिलजी — इसने खिलजी वंश की स्थापना की।
- अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) — इसके बचपन का नाम अली गुरशास्प था। इसने सिकन्दर-ए-सानी (द्वितीय सिकन्दर) की उपाधि धारण की। इसका राज्याभिषेक दिल्ली में बलबन के 'लाल महल' में हुआ था। इसने सेना को नकद वेतन देने व स्थाई सेना की नींव रखी तथा 'घोड़े दागने' एवं सैनिकों का 'हुलिया लिखने' की प्रथा शुरू की। खम्स (लूट का धन) में सुल्तान का हिस्सा 1/5 के स्थान पर 4/5 भाग कर दिया।
- बाजार नियंत्रण व्यवस्था — बाजार विनिमय प्रणाली की देखरेख के लिए 'दीवान-ए-रियासत' नामक विभाग बनाया। इसके अधीन नियुक्त अधिकारी: शहना-ए-मण्डी (बाजार अधीक्षक), सराय अदल (न्याय के लिए वस्त्र/शक्कर का बाजार), बरीद-ए-मण्डी (बाजार निरीक्षक) तथा मुन्हेंयान (गुप्तचर) थे।
- निर्माण कार्य — जमात खाना मस्जिद, अलाई दरवाजा, सीरी का किला तथा हजार खम्भा महल का निर्माण करवाया।
3. तुगलक वंश (1320-1414 ई.)
- ग्यासुद्दीन तुगलक (गाजी मलिक) — इसने तुगलक वंश की नींव रखी। यह सिंचाई हेतु नहरों का निर्माण करवाने वाला प्रथम सुल्तान था। प्रसिद्ध सूफी संत निजामुद्दीन औलिया ने इसके बारे में कहा था— "दिल्ली अभी बहुत दूर है।"
- मोहम्मद बिन तुगलक (1325-51 ई.) — इसका मूल नाम जूना खां (जौना खां) था, जिसे 'मनियारों का राजकुमार' कहा जाता है। यह सल्तनत काल का सर्वाधिक शिक्षित व विद्वान शासक था। बर्नी के अनुसार इसकी 5 मुख्य योजनाएं असफल रहीं: दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि, राजधानी परिवर्तन (दिल्ली से देवगिरि/दौलताबाद), सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन, खुरासान अभियान तथा कराचिल अभियान। कृषि विकास के लिए इसने 'अमीर-ए-कोही' नामक नए विभाग की स्थापना की। इसके काल में 1333 ई. में अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता भारत आया, जिसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया गया (इसकी पुस्तक का नाम 'रेहला' है)।
- फिरोजशाह तुगलक (1351-88 ई.) — यह ब्राह्मणों पर जजिया कर लागू करने वाला पहला मुसलमान शासक था। इसने सिंचाई के लिए 5 बड़ी नहरें बनवाईं तथा 1200 बाग लगवाए। अनाथ मुस्लिम महिलाओं व विधवाओं की सहायता के लिए 'दीवान-ए-खैरात' तथा दासों की देखभाल के लिए 'दीवान-ए-बन्दगान' विभाग की स्थापना की। इसने अपनी आत्मकथा 'फुतूहात-ए-फिरोजशाही' की रचना की।
4. सैयद वंश व लोदी वंश (1414-1526 ई.)
- सैयद वंश (1414-51 ई.) — संस्थापक खिज्र खां था, जिसने 'रैयत-ए-आला' की उपाधि धारण की।
- लोदी वंश (1451-1526 ई.) — बहलोल लोदी दिल्ली का प्रथम अफगान शासक था, जिसने 'बहलोल सिक्के' चलवाए।
- सिकन्दर लोदी (1489-1517 ई.) — इसने 1504 ई. में 'आगरा' शहर की नींव डालकर इसे अपनी राजधानी बनाया। यह 'गुलरूखी' उपनाम से फारसी में कविताएं लिखता था। भूमि मापन के लिए इसने प्रामाणिक पैमाना 'गज-ए-सिकन्दरी' (30 इंच) का प्रचलन किया।
- इब्राहिम लोदी (1517-26 ई.) — यह इस वंश का अंतिम शासक था। 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी की हत्या कर मुगलवंश की नींव डाली।
भाग 3: सल्तनत कालीन प्रशासनिक, आर्थिक व स्थापत्य व्यवस्था
1. महत्वपूर्ण प्रशासनिक विभाग एवं अधिकारी
| विभाग / अधिकारी | प्रशासनिक कार्य / स्वरूप |
|---|---|
| दीवान-ए-विजारत (वजीर) | राजस्व विभाग का प्रधान / वित्त विभाग |
| आरिज-ए-मुमालिक | सेना विभाग (दीवान-ए-अर्ज़) का प्रधान |
| दबीर-ए-खास | शाही पत्र-व्यवहार विभाग (दीवान-ए-इंशा) का प्रधान |
| दीवान-ए-रसालत | विदेश विभाग का प्रधान |
| काजी-उल-कुजात | न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी (सुल्तान के बाद) |
| शिकदार | शिख (ज़िला) का प्रमुख सैन्य अधिकारी |
| आमिला | परगने का मुख्य राजस्व अधिकारी |
2. सल्तनत काल के प्रमुख कर (Taxes)
- उश्र — मुसलमानों से लिया जाने वाला भूमि कर।
- खराज — गैर-मुसलमानों से लिया जाने वाला भूमि कर (सामान्यतः 1/5 से 1/2 भाग)।
- खम्स — लूट, खानों एवं भूमि में गड़े हुए खजानों से प्राप्त धन।
- जकात — मुसलमानों पर धार्मिक कर (सम्पत्ति का ढाई प्रतिशत)।
- जजिया — गैर-मुसलमानों (हिन्दुओं) पर लिया जाने वाला धार्मिक व सुरक्षात्मक कर।
3. प्रमुख नगर एवं उनके संस्थापक
| नगर का नाम | संस्थापक शासक / व्यक्ति | नगर का नाम | संस्थापक शासक / व्यक्ति |
|---|---|---|---|
| जोधपुर | मारवाड़ का राव जोधा | जौनपुर / तुगलकाबाद | फिरोजशाह तुगलक / ग्यासुद्दीन तुगलक |
| हैदराबाद | कुली कुतुब शाह (1590 ई.) | आगरा | सिकन्दर लोदी (1504 ई.) |
| अहमदाबाद | अहमदशाह प्रथम (गुजरात) | श्रीनगर / अजमेर | अशोक / अजयराज (चौहान) |
4. सल्तनत कालीन प्रमुख स्थापत्य एवं साहित्य
- कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद — कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा दिल्ली में निर्मित, भारतीय इस्लामिक शैली में निर्मित यह प्रथम स्थापत्य है।
- अढ़ाई दिन का झोंपड़ा — अजमेर में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा निर्मित। यह पहले एक संस्कृत विद्यालय था, जिसकी दीवारों पर 'हरकेलि' नाटक के अंश उत्कीर्ण हैं।
- कुतुबमीनार — निर्माण कार्य कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू किया, इल्तुतमिश ने इसे 3 मंजिल बनवाया तथा फिरोजशाह तुगलक ने इसकी मरम्मत करवाकर एक मंजिल और बढ़वाई।
- सुल्तानगढ़ी का मकबरा — इल्तुतमिश द्वारा दिल्ली में निर्मित भारत का प्रथम मकबरा। ग्यासुद्दीन तुगलक का मकबरा दिल्ली में स्थित पंचकोणीय मकबरा है।
| लेखक / विद्वान | प्रसिद्ध पुस्तक का नाम | वर्णित विषय / मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| अलबरूनी | किताब-ул-हिन्द / कानून-ए-मसऊदी | भारतीय विज्ञान, भूगोल और खगोलशास्त्र पर विस्तृत ग्रंथ। |
| अमीर खुसरो | खजाइन-उल-फुतूह / तुगलकनामा / मिफ्ताह-उल-फुतूह | अलाउद्दीन के सैन्य अभियानों व ग्यासुद्दीन तुगलक के उदय का वर्णन। इन्हें 'तूती-ए-हिन्द' (भारत का तोता) कहा जाता है। इन्होंने सितार-तब्ले व कव्वाली गायन का आविष्कार किया। |
| इब्नबतूता | किताब-उल-रेहला | मोहम्मद बिन तुगलक के समय की घटनाओं व डाक व्यवस्था का यात्रा वृत्तांत। |
| फिरोजशाह तुगलक | फुतूहात-ए-फिरोजशाही | फिरोजशाह तुगलक की स्वयं द्वारा लिखित आत्मकथा। |
| जिया-उद्दीन बरनी | तारीखे फिरोजशाही / फतवा-ए-जहांदारी | अलाउद्दीन खिलजी की आर्थिक नीति व सल्तनत कालीन न्याय व्यवस्था। |