NCERT सार संकलन: मध्यकालीन राजवंश, राष्ट्रकूट, पल्लव व प्राचीन लेखक
Table of Contents
- भाग 1: उत्तर भारत के प्रमुख राजवंश (राजपूत व अन्य काल)
- 1. पाल, सेन, गुर्जर-प्रतिहार एवं चौहान वंश
- 2. परमार, चंदेल व सोलंकी वंश
- भाग 2: दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंश (प्रशासन व कला)
- 1. राष्ट्रकूट राजवंश
- 2. चालुक्य वंश (बादामी, कल्याणी व वेंगी)
- 3. पल्लव वंश — कला एवं वास्तुकला
- भाग 3: प्राचीन भारत के प्रमुख ग्रंथ एवं उनके लेखक
Key Points
- पाल वंश के धर्मपाल ने बौद्ध शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र 'विक्रमशिला विश्वविद्यालय' की स्थापना की थी.
- लक्ष्मणसेन के दरबारी कवि जयदेव ने 'गीत गोविन्द' की रचना की थी, जो बंगाल के अंतिम हिन्दू राजवंश के शासक थे.
- तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ई. में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी के बीच हुआ, जिसमें चौहान की विजय हुई थी.
- राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम ने एलोरा में चट्टान काटकर प्रसिद्ध 'कैलाश मंदिर' का निर्माण करवाया था.
- चालुक्य वंश के सबसे प्रतापी राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा तट पर वर्द्धन नरेश हर्षवर्धन को पराजित किया था.
- महाबलिपुरम के प्रसिद्ध 'एकाश्मक रथ मंदिरों' (सप्त पैगोडा) का निर्माण पल्लव शासक नरसिंह वर्मन प्रथम ने करवाया था.
- संस्कृत व्याकरण का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ 'अष्टाध्यायी' महर्षि पाणिनी द्वारा रचित है.
भाग 1: उत्तर भारत के प्रमुख राजवंश (राजपूत व अन्य काल)
हर्षवर्धन के साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत में क्षेत्रीय शक्तियों का उदय हुआ। बौद्ध ग्रंथ 'राजतरंगिणी' (कल्हण रचित) से कश्मीर के राजवंशों (कार्कोट, उत्पल, लोहार) तथा 36 राजपूत कुलों का वर्णन मिलता है.
1. पाल, सेन, गुर्जर-प्रतिहार एवं चौहान वंश
- पाल वंश (बंगाल) — स्थापना 750-770 ई. में जनता द्वारा चुने गए शासक गोपाल ने की, जिसने ओदन्तपुरी विहार बनवाया. इसकी राजधानी मुंगेर थी. सबसे शक्तिशाली शासक धर्मपाल था, जिसने 'विक्रमशिला' तथा 'सोमपुरी' विहारों की स्थापना की. कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष में पाल वंश की ओर से सर्वप्रथम धर्मपाल ही शामिल हुआ था.
- सेन वंश — स्थापना सामंत सामंत ने 'राढ़' में की तथा राजधानी नदिया (लखनौती) थी. प्रथम स्वतंत्र शासक विजयसेन (शैवधर्मी) था, जिसने देवपाड़ा में प्रद्युम्नेश्वर मंदिर बनवाया. बल्लाल सेन ने 'दानसागर' व 'अद्भुतसागर' ग्रंथ लिखे. लक्ष्मणसेन के दरबार में 'गीत गोविन्द' के लेखक जयदेव तथा 'पवनदूतम्' के लेखक धोई रहते थे.
- गुर्जर-प्रतिहार वंश — स्थापना हरीशचन्द्र ने की, परन्तु वास्तविक संस्थापक नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) था, जिसने राजधानी कन्नौज बनाई. गुर्जर जाति का प्रथम उल्लेख पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में मिलता है. सबसे प्रतापी शासक मिहिरभोज प्रथम था, जिसने 'आदिवराह' व 'प्रभास' की उपाधि धारण की. प्रसिद्ध विद्वान राजशेखर प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल प्रथम के दरबार में रहते थे.
- चौहान वंश (दिल्ली और अजमेर) — दिल्ली नगर की स्थापना तोमर नरेश अनंगपाल ने 11वीं सदी में की. 7वीं सदी में सांभर के पास वासुदेव ने शाकम्भरी के चौहान राज्य की स्थापना की. अजयपाल ने अजमेर नगर बसाया. विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) ने तोमरों से दिल्ली जीती तथा 'हरकेलि' नाटक की रचना की. पृथ्वीराज तृतीय के राजकवि चन्दबरदाई ने 'पृथ्वीराज रासो' तथा जयानक ने 'पृथ्वीराज विजय' की रचना की. तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.) में पृथ्वीराज की विजय हुई तथा तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में मोहम्मद गोरी की विजय हुई.
2. परमार, चंदेल व सोलंकी वंश
- मालवा का परमार वंश — स्थापना उपेन्द्र ने की. प्रतापी शासक राजा भोज था, जिसने उज्जैन को राजधानी बनाया.
- बुंदेलखंड का चंदेल वंश — बुंदेलखंड का प्राचीन नाम 'जेजाकभुक्ति' था. स्थापना नन्नुक (831 ई.) ने की तथा राजधानी खजुराहो थी. धंगदेव ने खजुराहो में प्रसिद्ध कंदरिया महादेव मंदिर (999 ई.) बनवाया. इस वंश का अंतिम शासक परमर्दिदेव (1202 ई.) था, जिसके दरबार में प्रसिद्ध सेनानायक आल्हा-ऊदल रहते थे.
- गुजरात का सोलंकी वंश (चालुक्य) — संस्थापक मूलराज (942-995 ई.) ने अन्हिलवाड़ को राजधानी बनाया. भीम प्रथम के समय महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा तथा भीम के सामंत विमल ने आबू पर्वत पर दिलवाड़ा का प्रसिद्ध जैन मंदिर बनवाया.
- गहड़वाल वंश — प्रतापी शासक गोविन्द चन्द्र था जिसके मन्त्री लक्ष्मीधर ने 'कृत्य कल्पतरु' लिखा. अंतिम शासक जयचन्द था, जो 1194 ई. में चन्दावर के युद्ध में मोहम्मद गोरी से पराजित हुआ.
भाग 2: दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंश (प्रशासन व कला)
1. राष्ट्रकूट राजवंश
स्थापना 760 ई. में दन्तिदुर्ग ने चालुक्य शासक कीर्तिवर्मा द्वितीय को पराजित कर की तथा मान्यखेट को अपनी राजधानी बनाया.
- कृष्ण प्रथम — इन्होंने एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण करवाया.
- अमोघवर्ष (814-878 ई.) — इन्होंने कन्नड़ भाषा में प्रसिद्ध ग्रंथ 'कविराजमार्ग' की रचना की.
- कृष्ण तृतीय — ये राष्ट्रकूट वंश के अंतिम महान शासक थे, जिन्होंने तक्कोलम के युद्ध में चोल शासक परान्तक को पराजित किया.
2. चालुक्य वंश (बादामी, कल्याणी व वेंगी)
- बादामी/वातापी के चालुक्य — संस्थापक पुलकेशिन प्रथम था. पुलकेशिन द्वितीय इस वंश का सबसे महान राजा था, जिसने हर्षवर्धन को हराकर 'परमेश्वर' व 'दक्षिणापथेश्वर' की उपाधि धारण की. इसने पल्लव नरेश महेन्द्रवर्मन प्रथम को पराजित किया परन्तु नरसिंहवर्मन प्रथम से पराजित हुआ, जिसने 'वातापीकोण्ड' की उपाधि ली.
- कल्याणी के चालुक्य — स्थापना तैलप द्वितीय ने की. विक्रमादित्य VI के दरबार में विज्ञानेश्वर (हिन्दू विधि ग्रंथ 'मितक्षरा' के लेखक) तथा बिल्हण ('विक्रमांकदेवचरित' के लेखक) रहते थे.
3. पल्लव वंश — कला एवं वास्तुकला
स्थापना सिंहविष्णु (575 ई.) ने की तथा राजधानी काँची (तमिलनाडु) थी. सिंहविष्णु के दरबार में 'किरातार्जुनीयम्' के लेखक भारवि रहते थे. महेन्द्रवर्मन प्रथम ने 'मत्तविलास प्रहसन' नामक परिहास नाटक लिखा.
पल्लव कला का विकास चार शैलियों में हुआ:
| शैली का नाम | मुख्य शासक | स्थापत्य कला की विशेषताएँ / प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| महेन्द्र वर्मन शैली | महेन्द्र वर्मन प्रथम | कठोर पाषाण को काटकर गुहा मंदिरों का निर्माण. |
| नरसिंह वर्मन शैली (मामल्लशैली) | नरसिंह वर्मन प्रथम | महाबलिपुरम के एकाश्मक रथ (एकाश्म मंदिर / सप्त पैगोडा). इसमें 8 रथ हैं (धर्मराज, अर्जुन, भीम, सहदेव, द्रौपदी आदि). |
| राजसिंह शैली | नरसिंह वर्मन द्वितीय | गुहा मंदिरों के स्थान पर पाषाण व ईंट से संरचनात्मक मंदिर निर्माण. महाबलिपुरम का तट मंदिर (शोर मंदिर) व काँची का कैलाशनाथ मंदिर. |
| नंदि वर्मन शैली | नंदि वर्मन | अपेक्षाकृत छोटे मंदिर निर्मित हुए, जैसे काँची का मुक्तेश्वर मंदिर. |
भाग 3: प्राचीन भारत के प्रमुख ग्रंथ एवं उनके लेखक
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्राचीन संस्कृत, पाली व प्राकृत ग्रंथों एवं उनके रचनाकारों की सूची नीचे दी गई है:
| ग्रंथ का नाम | लेखक / रचनाकार | ग्रंथ का नाम | लेखक / रचनाकार |
|---|---|---|---|
| अष्टाध्यायी | पाणिनी | काव्यमीमांसा / बालरामायण | राजशेखर |
| रामायण | वाल्मीकि | महाविभाषा शास्त्र | वसुमित्र |
| महाभारत | वेदव्यास | चरक संहिता | चरक |
| बुद्धचरितम् / सौन्दरानन्द | अश्वघोष | मितक्षरा | विज्ञानेश्वर |
| मुद्राराक्षस | विशाखदत्त | किरातार्जुनीयम् | भारवि |
| अर्थशास्त्र | चाणक्य | राजतरंगिणी | कल्हण |
| महाभाष्य | पतंजलि | गीत गोविन्द | जयदेव |
| सांख्यकारिका | ईश्वरकृष्ण | शिशुपाल वध | माघ |
| स्वप्नवासवदत्ता | भास | नैषधचरित् | श्री हर्ष |
| हर्षचरित / कादम्बरी | बाणभट्ट | पंचतंत्र | विष्णु शर्मा |
| विक्रमांकदेवचरित | बिल्हण | गाथा सप्तशती | हाल |
| पृथ्वीराजरासो | चन्दबरदाई | आर्य सिद्धान्त | आर्यभट्ट द्वितीय |