संघीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति
Table of Contents
- संघीय कार्यपालिका (The Union Executive) — राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति
- 1. भारत का राष्ट्रपति (The President of India)
- राष्ट्रपति पद हेतु योग्यताएँ (अनुच्छेद 58)
- निर्वाचन प्रक्रिया एवं मत मूल्य निर्धारण
- कार्यकाल, वेतन एवं शपथ
- महाभियोग प्रक्रिया (अनुच्छेद 61)
- राष्ट्रपति की शक्तियाँ
- राष्ट्रपति की वीटो (निषेधाधिकार) शक्तियां
- राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियां
- उन्मुक्तियाँ एवं विशेषाधिकार
- भारत के राष्ट्रपति: महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (Quick Facts)
- 2. भारत का उपराष्ट्रपति (The Vice-President of India)
- योग्यताएँ एवं निर्वाचन
- कार्यकाल, वेतन एवं पदच्युति
- कार्य एवं अधिकार (अनुच्छेद 65)
- राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेदों की तालिका
Key Points
- भारतीय संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 52 से 78 के अंतर्गत केंद्रीय कार्यपालिका का विस्तृत उल्लेख है.
- राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा होता है.
- अनुच्छेद 61 राष्ट्रपति पर संविधान के अतिक्रमण के आधार पर महाभियोग चलाने की विशेष प्रक्रिया निर्धारित करता है.
- ज्ञानी जैलसिंह ने वर्ष 1986 में भारतीय डाक (संशोधन) विधेयक पर पहली बार 'जेबी वीटो' (Pocket Veto) का प्रयोग किया था.
- उपराष्ट्रपति का पद संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित है और वह राज्यसभा का पदेन सभापति होता है.
- उपराष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में संसद के दोनों सदनों के सभी निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्य भाग लेते हैं.
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के सबसे लंबी अवधि तक रहने वाले एकमात्र राष्ट्रपति हैं.
संघीय कार्यपालिका (The Union Executive) — राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति
भारत में ब्रिटिश विरासत से प्राप्त संसदीय शासन प्रणाली अस्तित्व में है. इस संसदीय प्रणाली में दो प्रकार के कार्यपालिका प्रमुखों का प्रावधान किया गया है — 1. संवैधानिक प्रमुख (नाममात्र का प्रमुख) तथा 2. वास्तविक प्रमुख (प्रधानमंत्री).
1. भारत का राष्ट्रपति (The President of India)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 में 'राष्ट्रपति' पद का प्रावधान किया गया है. राष्ट्रपति का पद सर्वाधिक सम्मान, गरिमा तथा प्रतिष्ठा का है और वह राष्ट्र का अध्यक्ष तथा भारत का प्रथम नागरिक कहलाता है.
- कार्यपालिका शक्तियां — केंद्र सरकार की समस्त कार्यपालिका शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होती हैं, जिनका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है. भारत सरकार के समस्त कार्यपालिका सम्बन्धी कार्य उसी के नाम से संचालित किए जाते हैं.
- संवैधानिक मर्यादा — राष्ट्रपति की वही स्थिति है जो ब्रिटिश संविधान में सम्राट की है. वह राज्य का प्रधान है, कार्यपालिका का नहीं. वह राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है, शासन का नहीं. वह साधारणतया मंत्रियों की सलाह मानने को बाध्य होता है.
राष्ट्रपति पद हेतु योग्यताएँ (अनुच्छेद 58)
अनुच्छेद 58 के अनुसार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ अनिवार्य हैं:
- वह भारत का नागरिक हो.
- उसकी आयु 35 वर्ष से कम न हो.
- वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो.
- वह भारत या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर आसीन न हो.
- प्रस्तावक एवं अनुमोदक — राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए निर्वाचक मण्डल के 50 सदस्य प्रस्तावक के रूप में तथा 50 सदस्य अनुमोदक के रूप में होना आवश्यक है.
निर्वाचन प्रक्रिया एवं मत मूल्य निर्धारण
राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मण्डल (Electors) द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत-पद्धति (Single Transferable Vote System) और गुप्त मतदान द्वारा होता है.
- निर्वाचक मण्डल के सदस्य — इसमें लोकसभा, राज्यसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं के केवल निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं (मनोनित सदस्य इसमें भाग नहीं लेते).
- न्यूनतम कोटा (Minimum Quota) — चुनाव में सफलता प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार को न्यूनतम कोटा प्राप्त करना आवश्यक है:
$$न्यूनतम कोटा = \frac{दिए\ गए\ मतों\ की\ संख्या}{राष्ट्रपति\ पद\ हेतु\ प्रत्याशियों\ की\ संख्या} + 1$$
मत मूल्य निकालने के सूत्र:
| श्रेणी | निर्धारण का सूत्र |
|---|---|
| राज्य की विधानसभा के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य का मत-मूल्य | $$= \left[ \frac{राज्य\ की\ कुल\ जनसंख्या}{राज्य\ की\ विधानसभा\ की\ कुल\ निर्वाचित\ सदस्यों\ की\ संख्या} \right] \div 1000$$ |
| संसद के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य का मत-मूल्य | $$= \left[ \frac{सभी\ राज्यों\ की\ विधानसभाओं\ के\ कुल\ निर्वाचित\ सदस्यों\ के\ कुल\ मतों\ की\ संख्या}{संसद\ के\ कुल\ निर्वाचित\ सदस्यों\ की\ संख्या} \right] \div 1000$$ |
कार्यकाल, वेतन एवं शपथ
- कार्यकाल — राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष का होता है. यदि पद रिक्त हो जाए तो नए राष्ट्रपति का चुनाव पुनः पूरे 5 वर्ष की सम्पूर्ण अवधि के लिए होता है, न कि शेष अवधि के लिए.
- वेतन — राष्ट्रपति का मासिक वेतन 5,00000 रुपये (आयकर से मुक्त) है. अनुच्छेद 59 के अनुसार कार्यकाल के दौरान उनके वेतन और भत्ते घटाए नहीं जा सकते.
- शळथ — राष्ट्रपति को पद और गोपनीयता की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उनकी अनुपस्थिति में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है.
- त्यागपत्र — राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को सम्बोधित करता है.
महाभियोग प्रक्रिया (अनुच्छेद 61)
राष्ट्रपति को उसकी पदावधि की समाप्ति से पूर्व संविधान के उल्लंघन के आरोप में महाभियोग लगाकर पदमुक्त किया जा सकता है.
- यह प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में 14 दिन की पूर्व लिखित सूचना के साथ शुरू की जा सकती है, बशर्ते उस सदन के एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर हों.
- यदि संसद के दोनों सदन अलग-अलग अपने दो-तिहाई बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर देते हैं, तो राष्ट्रपति को पदमुक्त मान लिया जाता है.
- पद रिक्ति की स्थिति — यदि राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र या महाभियोग के कारण रिक्त होता है, तो 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. इस दौरान उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है.
राष्ट्रपति की शक्तियाँ
- कार्यपालिका शक्तियां — वह प्रधानमंत्री, अन्य मंत्रियों, राज्यों के राज्यपालों, महान्यायवादी, कैग (CAG), मुख्य निर्वाचन आयुक्त, वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष आदि की नियुक्ति करता है. वह विदेशी राजनयिकों के आमंत्रण-पत्र स्वीकार करता है.
- विधायी शक्तियां — राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग होता है. वह संसद का सत्र आहूत, सत्रावसान और लोकसभा को भंग कर सकता है. नए राज्यों के निर्माण, धन विधेयक (अनुच्छेद 110) आदि के लिए राष्ट्रपति की पूर्वानुमति आवश्यक है. वह राज्यसभा में कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा क्षेत्र से 12 सदस्यों को मनोनीत करता है. अनुच्छेद 123 के तहत वह अध्यादेश जारी कर सकता है.
- न्यायिक शक्तियां (अनुच्छेद 72) — उसे किसी अपराधी की सजा को क्षमा, प्रविलम्बन, परिहार और लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है. वह मृत्युदण्ड और कोर्ट मार्शल की सजा को भी माफ कर सकता है. अनुच्छेद 143(1) के तहत वह सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श ले सकता है.
- सैन्य शक्तियां (अनुच्छेद 53) — वह भारत के रक्षा बलों का सर्वोच्च कमांडर (Supreme Commander) होता है तथा उसे युद्ध व शान्ति की घोषणा करने का अधिकार है.
- आपातकालीन शक्तियां — संविधान के अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल), अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन), और अनुच्छेद 360 (वित्तीय आपातकाल) के अंतर्गत उसे विशेष शक्तियां प्राप्त हैं.
राष्ट्रपति की वीटो (निषेधाधिकार) शक्तियां
भारतीय राष्ट्रपति को तीन प्रकार की वीटो शक्तियां प्राप्त हैं:
- आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto) — इसके तहत राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अपनी अनुमति नहीं देता है, अर्थात विधेयक को सुरक्षित रख लेता है.
- निलंबनकारी वीटो (Suspension Veto) — इसके अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार हेतु वापस भेज सकता है.
- जेबी वीटो (Pocket Veto) — इसमें राष्ट्रपति विधेयक को अनिश्चित काल के लिए अपने पास सुरक्षित रख सकता है, अर्थात न तो अनुमति देता है, न मना करता है और न ही पुनर्विचार हेतु भेजता है. ऐतिहासिक तथ्य: ज्ञानी जैलसिंह ने भारतीय डाक (संशोधन) विधेयक, 1986 के संबंध में सर्वप्रथम जेबी वीटो का प्रयोग किया था.
राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियां
संविधान के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है (अनुच्छेद 74), परंतु विशेष परिस्थितियों में वह अपने विवेक का प्रयोग करता है:
- जब किसी एक पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हो और त्रिशंकु संसद की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करनी हो.
- प्रधानमंत्री की अचानक मृत्यु की दशा में.
- यदि सत्तारूढ़ मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया हो और वह लोकसभा के विघटन की सिफारिश करे.
उन्मुक्तियाँ एवं विशेषाधिकार
- अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति को कई प्रकार की उन्मुक्तियाँ प्राप्त हैं. पद के दायित्वों के निर्वहन के लिए उसे किसी न्यायालय में उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता.
- पदावधि के दौरान उसके विरुद्ध कोई भी दाण्डिक कार्यवाही (Criminal Proceeding) न तो संस्थित की जाएगी और न ही चालू रखी जाएगी. पदावधि के दौरान उसकी गिरफ्तारी या कारावास के लिए कोई अदालत आदेश जारी नहीं कर सकती.
भारत के राष्ट्रपति: महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (Quick Facts)
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद — सबसे लम्बी अवधि (1950-62) तक राष्ट्रपति रहे और संविधान सभा द्वारा 24 जनवरी 1950 को निर्विरोध चुने गए थे.
- डॉ. जाकिर हुसैन — प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति, जिनका कार्यकाल सबसे कम अवधि का रहा और पद पर रहते हुए मृत्यु हुई. इनके निधन पर एम. हिदायतुल्लाह (सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश) ने प्रथम बार कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाला था.
- नीलम संजीव रेड्डी — लोकसभा अध्यक्ष रहे तथा भारत के एकमात्र निर्विरोध निर्वाचित होने वाले सबसे कम उम्र (64 वर्ष) के राष्ट्रपति थे.
- वी.वी. गिरी — एकमात्र राष्ट्रपति जिनके निर्वाचन में द्वितीय चक्र की मतगणना करनी पड़ी तथा वे सबसे कम मतों के अंतर (50.2 प्रतिशत) से जीते थे.
- प्रतिभा देवीसिंह पाटिल — भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति (12वीं राष्ट्रपति के रूप में).
2. भारत का उपराष्ट्रपति (The Vice-President of India)
भारतीय संविधान की अधिकृत अग्रता अधिप्रत्र में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है. 'उपराष्ट्रपति' पद की संकल्पना संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के संविधान से ली गई है.
अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा तथा अनुच्छेद 64 के तहत वह 'राज्यसभा का पदेन सभापति' (Ex-officio Chairman) होता है.
योग्यताएँ एवं निर्वाचन
- योग्यताएँ — वह भारत का नागरिक हो, न्यूनतम आयु 35 वर्ष हो तथा वह राज्यसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो.
- निर्वाचन (अनुच्छेद 66) — उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा + राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बने 'निर्वाचन मण्डल' द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा होता है. (नोट: इसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, परंतु राज्य विधानसभाओं के सदस्य भाग नहीं लेते).
कार्यकाल, वेतन एवं पदच्युति
- कार्यकाल — उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष निर्धारित किया गया है. वह इससे पूर्व राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप सकता है.
- वेतन एवं भत्ते — वर्तमान में उपराष्ट्रपति को 4,00,000 रुपये प्रति माह वेतन व अन्य भत्ते प्राप्त होते हैं. (नोट: इन्हें यह वेतन उपराष्ट्रपति पद के लिए नहीं, बल्कि राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य करने के लिए प्राप्त होता है).
- पदच्युति (हटाना) — भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67, 68 और 71 के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के ऐसे संकल्प (प्रस्ताव) द्वारा हटाया जा सकता है, जिसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित किया गया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो. इसके लिए भी 14 दिन पूर्व सूचना देना आवश्यक है.
कार्य एवं अधिकार (अनुच्छेद 65)
- सामान्य स्थिति में उपराष्ट्रपति को संविधान द्वारा कोई विशिष्ट कार्य नहीं सौंपा गया है, वह केवल राज्यसभा के सभापति के रूप में सदन का संचालन करता है.
- असामान्य स्थिति (अनुच्छेद 65) — जब राष्ट्रपति का पद आकस्मिक रिक्त (मृत्यु, बीमारी या त्यागपत्र के कारण) होता है, तब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है. इस अवधि के दौरान उसे राष्ट्रपति के वेतन-भत्ते व समस्त विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, न कि राज्यसभा के सभापति के.
राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेदों की तालिका
| अनुच्छेद | राष्ट्रपति से संबंधित विषय-वस्तु | अनुच्छेद | उपराष्ट्रपति से संबंधित विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|
| अनु. 52 | भारत का राष्ट्रपति | अनु. 63 | भारत का उपराष्ट्रपति |
| अनु. 53 | संघ की कार्यपालिका शक्ति | अनु. 64 | उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना |
| अनु. 54 | राष्ट्रपति का निर्वाचक मण्डल | अनु. 65 | आकस्मिक रिक्तियों में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना |
| अनु. 55 | राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति | अनु. 66 | उपराष्ट्रपति का चुनाव |
| अनु. 56 | राष्ट्रपति की पदावधि | अनु. 67 | उपराष्ट्रपति का कार्यकाल |
| अनु. 57 | पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता | अनु. 68 | उपराष्ट्रपति कार्यालय की रिक्ति को भरने के लिए चुनाव का समय |
| अनु. 58 | राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं | अनु. 69 | उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ ग्रहण |
| अनु. 60 | राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान | अनु. 70 | अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन |
| अनु. 61 | राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया | अनु. 71 | राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव संबंधी मामले |