भारतीय संविधान का विकास और निर्माण - सम्पूर्ण इतिहास
Table of Contents
- संवैधानिक विकास: संक्षिप्त रूपरेखा
- 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773
- 2. एक्ट ऑफ सेटलमेंट, 1781
- 3. पिट्स इण्डिया अधिनियम, 1784
- 4. 1786 का अधिनियम
- 5. 1793 का चार्टर अधिनियम
- 6. 1813 का चार्टर अधिनियम
- 7. 1833 का चार्टर अधिनियम
- 8. 1853 का चार्टर अधिनियम
- 9. 1858 का भारत शासन अधिनियम
- 10. 1861 का भारत शासन अधिनियम
- 11. 1892 का भारत शासन अधिनियम
- 12. भारतीय परिषद् अधिनियम, 1909 (मार्ले-मिन्टो सुधार)
- 13. 1919 का भारत सरकार अधिनियम (मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार)
- 14. 1935 का भारत सरकार अधिनियम
- 15. 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
- भारतीय संविधान का निर्माण
- संविधान सभा के विकास के चरण
- प्रारूप समिति (Drafting Committee)
- संविधान सभा की प्रमुख समितियाँ एवं उनके अध्यक्ष
- संविधान की स्वीकृति एवं महत्वपूर्ण तथ्य
- भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत
- भारतीय संविधान की उद्देश्यिका (प्रस्तावना)
- उद्देश्यिका के मुख्य तत्व व शब्दावली
- भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ
Key Points
- भारतीय संविधान के विकास की नींव 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से पड़ी, जिसके द्वारा कलकत्ता में प्रथम सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना हुई।
- 1919 के अधिनियम द्वारा प्रांतों में तथा 1935 के अधिनियम द्वारा केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई थी।
- कैबिनेट मिशन योजना 1946 के तहत गठित संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन में संविधान का निर्माण पूर्ण किया।
- 26 नवम्बर, 1949 को संविधान अंगीकृत किया गया, जिसे वर्तमान में 'संविधान दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
- भारतीय संविधान में संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से, मौलिक अधिकार अमेरिका से और नीति निदेशक तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं।
- मूल संविधान में केवल 8 अनुसूचियाँ थीं, जो वर्तमान संशोधनों के बाद बढ़कर 12 हो चुकी हैं।
संवैधानिक विकास: संक्षिप्त रूपरेखा
संविधान जीवन का वह मार्ग है, जिसे राज्य अपने लिए अपनाता है। यह किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था का वह आधारभूत ढांचा निर्धारित करता है, जिसके अंतर्गत उसकी जनता शासित होती है। भारतीय संविधान के निर्माण की एक लम्बी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रही है, जो ब्रिटिश संसद द्वारा समय-समय पर पारित चार्टर और अधिनियमों से जुड़ी है।
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773
- गवर्नर जनरल पद: कंपनी के समस्त भारतीय क्षेत्रों को एक सूत्र में बांधने के लिए बंगाल के गवर्नर को 'गवर्नर जनरल' बना दिया गया।
- प्रांतीय सरकारों पर नियंत्रण: मद्रास और बम्बई के गवर्नर, गवर्नर जनरल के अधीन रहेंगे।
- कार्यकारिणी परिषद्: गवर्नर जनरल की सहायता के लिए एक चार सदस्यों वाली कार्यकारिणी परिषद् की व्यवस्था की गई।
- सर्वोच्च न्यायालय: कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय (1774) की व्यवस्था की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश (सर एलिजाह इम्पे) तथा तीन अन्य न्यायाधीश (लिमेंस्टर, चैम्बर्स एवं हाइड) थे।
2. एक्ट ऑफ सेटलमेंट, 1781
- 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए यह लाया गया। इसके द्वारा कलकत्ता की सरकार को उड़ीसा, बिहार व बंगाल के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया। गवर्नर-जनरल इन कौंसिल को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया गया।
3. पिट्स इण्डिया अधिनियम, 1784
- दोहरा शासन: इसके द्वारा दोहरे शासन का प्रारम्भ हुआ— (i) व्यापारिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' एवं (ii) राजनीतिक मामलों के लिए 'बोर्ड ऑफ कन्ट्रोलर'।
- बोर्ड ऑफ कन्ट्रोलर: इसमें 6 सदस्य थे जो भारत सरकार की देख-रेख करते थे। गवर्नर जनरल की परिषद् तीन सदस्यीय कर दी गई। कंपनी के कर्मचारियों को उपहार लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
4. 1786 का अधिनियम
- इस अधिनियम के द्वारा कॉर्नवालिस को भारतीय फौजों का मुख्य सेनापति बना दिया गया तथा उसे अपनी कौंसिल के निर्णय के विरुद्ध कार्यवाही करने का अधिकार भी दिया गया।
5. 1793 का चार्टर अधिनियम
- गवर्नर जनरल और गवर्नरों को अपनी कार्यकारिणी परिषद् के बहुमत के विरुद्ध कार्य करने की शक्ति मिली तथा नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों व कर्मचारियों के वेतन भारतीय राजस्व से देने की व्यवस्था की गई।
6. 1813 का चार्टर अधिनियम
- व्यापारिक एकाधिकार की समाप्ति: कंपनी के भारत के साथ व्यापार करने के एकाधिकार को छीन लिया गया, किंतु उसका चीन के साथ व्यापार और पूर्वी देशों के साथ चाय के व्यापार के सम्बन्ध में 20 वर्षों का एकाधिकार बना रहा।
- शिक्षा पर व्यय: शिक्षा के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपए वार्षिक देने की बात कही गई। कंपनी का अधिकार पत्र 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया।
7. 1833 का चार्टर अधिनियम
- पूर्ण व्यापारिक बदलाव: भारतीय व्यापार को सभी के लिए पूरी तरह खोल दिया गया।
- भारत का गवर्नर जनरल: बंगाल के गवर्नर जनरल को अब 'भारत का गवर्नर जनरल' कहा गया। लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में प्रथम 'विधि आयोग' का गठन किया गया।
8. 1853 का चार्टर अधिनियम
- डायरेक्टरों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई (जिसमें 6 क्राउन द्वारा मनोनीत होते थे)। सिविल सर्विसेज के सदस्यों के लिए खुली प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली की शुरुआत हुई।
9. 1858 का भारत शासन अधिनियम
- क्राउन का शासन: बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर की समाप्ति कर शासन ब्रिटिश क्राउन के हाथों में सौंपा गया।
- भारत सचिव व वायसराय: भारत सचिव (8 सदस्यों की परिषद् के साथ) की नियुक्ति हुई। गवर्नर जनरल को अब 'वायसराय' कहा गया (लॉर्ड कैनिंग अंतिम गवर्नर जनरल और प्रथम वायसराय बने)।
10. 1861 का भारत शासन अधिनियम
- वायसराय की कार्यकारिणी परिषद् का विस्तार हुआ और विभागीय प्रणाली (पोर्टफोलियो सिस्टम) का चलन शुरू हुआ। वायसराय को पहली बार अध्यादेश जारी करने की शक्ति दी गई।
11. 1892 का भारत शासन अधिनियम
- परोक्ष निर्वाचन प्रणाली की शुरुआत हुई। विधानमंडलों के सदस्यों को बजट पर बहस करने तथा प्रश्न पूछने का अधिकार मिला (परंतु मतदान का अधिकार नहीं था)।
12. भारतीय परिषद् अधिनियम, 1909 (मार्ले-मिन्टो सुधार)
- इसे मार्ले-मिन्टो सुधार भी कहा जाता है। इसमें केंद्रीय विधान परिषद् के सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ाकर 60 कर दी गई। इसके द्वारा पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व) की शुरुआत की गई।
13. 1919 का भारत सरकार अधिनियम (मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार)
- द्वैध शासन: प्रांतीय स्तर पर 'द्वैध शासन' का आरम्भ हुआ। प्रांतीय विषयों को दो भागों में बांटा गया— (i) हस्तांतरित विषय (शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि) और (ii) आरक्षित विषय (पुलिस, जेल, भू-राजस्व, वित्त आदि)।
- द्विसदनात्मक विधायिका: केंद्र में द्विसदनात्मक (सेंट्रल लेजिस्लेटिव और राज्य परिषद्) व्यवस्था की गई। भारत में एक 'लोक सेवा आयोग' की स्थापना का प्रावधान किया गया।
14. 1935 का भारत सरकार अधिनियम
- इसके द्वारा प्रांतीय द्वैध शासन समाप्त कर 'प्रांतीय स्वायत्तता' लागू की गई। केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई। संघीय न्यायालय (दिल्ली) और 'रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया' की स्थापना की गई।
15. 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
- 4 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में यह अधिनियम पारित हुआ। 15 अगस्त, 1947 को भारत दो अधिराज्यों (भारत और पाकिस्तान) में विभाजित हो गया। भारत सचिव व इंडिया ऑफिस के पद समाप्त कर दिए गए।
भारतीय संविधान का निर्माण
संविधान सभा के सिद्धांत का सर्वप्रथम दर्शन 1895 के 'स्वराज विधेयक' में होता है, जिसे तिलक के निर्देशन में तैयार किया गया था। अंततः वर्ष 1946 की 'कैबिनेट मिशन योजना' के तहत भारत के संविधान निर्माण हेतु एक परोक्ष निर्वाचन के आधार पर संविधान सभा की स्थापना की गई। इसमें कुल 389 सदस्य तय थे (292 ब्रिटिश प्रांतों के, 4 चीफ कमिश्नर क्षेत्रों के और 93 देशी रियासतों के)।
संविधान सभा के विकास के चरण
- प्रथम चरण (6 दिसम्बर, 1946 से 14 अगस्त, 1947): इस चरण में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान का 'उद्देश्य प्रस्ताव' प्रस्तुत किया, जिससे संविधान का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया आरम्भ हुई।
- द्वितीय चरण (15 अगस्त, 1947 से 26 नवम्बर, 1949): इस दौरान संविधान सभा ने एक संप्रभु संस्था के रूप में कार्य किया और संविधान के प्रारूप पर वाचन किया गया।
- तृतीय चरण (27 नवम्बर, 1949 से मार्च, 1952): इस दौरान संविधान सभा तब तक अंतरिम संसद के रूप में कार्य करती रही जब तक आम चुनाव के बाद नई संसद का निर्माण नहीं हो गया।
प्रारूप समिति (Drafting Committee)
संविधान के प्रारूप को तैयार करने के लिए 29 अगस्त, 1947 ई. को प्रारूप समिति का गठन किया गया। डॉ. भीमराव अम्बेडकर इसके अध्यक्ष थे। संविधान के प्रारूप पर कुल 114 दिनों तक चर्चा की गई और इस दौरान तीन वाचन (Reading) किए गए।
| पद / समिति | नाम / सदस्य |
|---|---|
| प्रारूप समिति अध्यक्ष | डॉ. भीमराव अम्बेडकर |
| प्रारूप समिति सदस्य | के.एम. मुंशी, मुहम्मद सादुल्ला, बी.एल. मित्र, अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यर, एन. गोपाल स्वामी आयंगर, डी.पी. खेतान |
| संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार | बी. एन. राव (इन्होंने प्रारूप तैयार किया जिसमें 243 अनुच्छेद व 13 अनुसूचियाँ थीं) |
संविधान सभा की प्रमुख समितियाँ एवं उनके अध्यक्ष
| बड़ी समितियाँ | अध्यक्ष |
|---|---|
| 1. संघ शक्ति समिति | पंडित जवाहर लाल नेहरू |
| 2. संघीय संविधान समिति | पंडित जवाहर लाल नेहरू |
| 3. प्रांतीय संविधान समिति | सरदार वल्लभभाई पटेल |
| 4. प्रारूप समिति | डॉ. भीमराव अम्बेडकर |
| 5. मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक समिति | सरदार वल्लभभाई पटेल |
| 6. प्रक्रिया नियम समिति | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
| 7. राज्यों के लिए समिति | पंडित जवाहर लाल नेहरू |
| 8. संचालन समिति | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
संविधान की स्वीकृति एवं महत्वपूर्ण तथ्य
- अंतिम रूप: 26 नवम्बर, 1949 को संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया। इस दिन मूल रूप से 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं।
- कुल समय और व्यय: संविधान के निर्माण में 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन का समय लगा और कुल 63 लाख 93 हजार 729 रुपए खर्च हुए।
- पूर्ण रूप से लागू: 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू किया गया।
भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत
| स्रोत देश | ग्रहण किए गए संवैधानिक प्रावधान |
|---|---|
| ब्रिटिश संविधान | संसदात्मक शासन प्रणाली, एकल नागरिकता, विधि निर्माण की प्रक्रिया, मंत्रिमंडल का सामूहिक उत्तरदायित्व। |
| अमेरिका का संविधान | मौलिक अधिकार, सर्वोच्च न्यायालय, संविधान की सर्वोच्चता, राष्ट्रपति पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति पद एवं न्यायिक पुनरावलोकन। |
| कनाडा का संविधान | संघात्मक व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियां केंद्र को सौंपना। |
| ऑस्ट्रेलिया का संविधान | प्रस्तावना की भावना, समवर्ती सूची, केंद्र और राज्यों के बीच संबंध। |
| आयरलैंड का संविधान | राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत, राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल की व्यवस्था। |
| जापान का संविधान | अनुच्छेद 21 की शब्दावली 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया'। |
| दक्षिण अफ्रीका का संविधान | संविधान संशोधन की पद्धति। |
| जर्मनी का वीमर संविधान | आपातकाल में राष्ट्रपति को मौलिक अधिकारों के स्थगन सम्बन्धी अधिकार। |
| 1935 का भारत शासन अधिनियम | लगभग 200 धाराएं इसी अधिनियम से हुबहू या आंशिक परिवर्तन के साथ ली गई हैं (जैसे- राज्यपाल का पद, लोक सेवा आयोग आदि)। |
भारतीय संविधान की उद्देश्यिका (प्रस्तावना)
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए... आज तारीख 26 नवम्बर 1949 (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी संवत् 2006 विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
उद्देश्यिका के मुख्य तत्व व शब्दावली
- संशोधन: प्रस्तावना में केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।
- सम्प्रभुता: भारत आंतरिक और बाह्य रूप से किसी अन्य विदेशी सत्ता के अधीन नहीं है।
- पंथनिरपेक्ष: भारत एक पंथनिरपेक्ष राज्य है, जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं है और यह सभी धर्मों के प्रति समभाव रखता है।
- न्याय और स्वतंत्रता: प्रस्तावना में 3 प्रकार के न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक) तथा 5 प्रकार की स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना) का उल्लेख है।
भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ
| अनुसूची | वर्णित विषय / क्षेत्र |
|---|---|
| प्रथम अनुसूची | भारतीय संघ के घटक राज्यों और संघीय क्षेत्रों का उल्लेख। |
| द्वितीय अनुसूची | राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा/राज्यसभा व विधानसभाओं के पदाधिकारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन का उल्लेख। |
| तृतीय अनुसूची | विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा पद ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का प्रारूप। |
| चतुर्थ अनुसूची | विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण। |
| पांचवीं अनुसूची | अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उल्लेख। |
| छठी अनुसूची | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान। |
| सातवीं अनुसूची | केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची)। |
| आठवीं अनुसूची | भारत की 22 भाषाओं का उल्लेख (मूल रूप से 14 भाषाएं थीं)। |
| नौवीं अनुसूची | प्रथम संविधान संशोधन (1951) द्वारा जोड़ी गई; राज्य द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण की विधियों का उल्लेख (न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती)। |
| दसवीं अनुसूची | 52वें संशोधन (1985) द्वारा जोड़ी गई; इसमें दल-बदल से सम्बन्धित प्रावधान हैं। |
| ग््यारहवीं अनुसूची | 73वें संशोधन (1992) द्वारा जोड़ी गई; पंचायती राज संस्थाओं को कार्य करने के लिए 29 विषय प्रदान किए गए हैं। |
| बारहवीं अनुसूची | 74वें संशोधन (1992) द्वारा जोड़ी गई; शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (नगरपालिकाओं) को कार्य करने हेतु 18 विषय प्रदान किए गए हैं। |