NCERT सार संकलन: सिन्धु सभ्यता, वैदिक काल व इतिहास के स्रोत
Table of Contents
- भाग 1: विदेशी यात्रियों के विवरण एवं पुरातात्विक साक्ष्य
- 1. प्रमुख विदेशी यात्रियों के वृत्तांत
- 2. पुरातात्विक संबंधी साक्ष्य: प्रमुख अभिलेख
- भाग 2: सिन्धु घाटी सभ्यता / हड़प्पा संस्कृति
- सैंधव सभ्यता के प्रमुख स्थल
- हड़प्पा संस्कृति में आयातित वस्तुएं एवं पतन के कारण
- भाग 3: वैदिक काल (ऋग्वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल)
- 1. वैदिक कालीन नदियाँ (प्राचीन एवं आधुनिक नाम)
- 2. वैदिक काल की महत्वपूर्ण शब्दावली
- 3. उत्तर वैदिक व्यवस्था, आश्रम एवं षड्दर्शन
Key Points
- हेरोडोटस को 'इतिहास का पिता' कहा जाता है, जिनकी पुस्तक 'हिस्टोरिका' में भारत-फारस संबंधों का प्राचीनतम विवरण है।
- कलिंग राज खारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख में सर्वप्रथम 'भारतवर्ष' शब्द का लिखित साक्ष्य प्राप्त होता है।
- रेडियो कार्बन C14 पद्धति के अनुसार सिन्धु सभ्यता का सर्वमान्य काल 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू. तक का माना गया है।
- राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला प्रसिद्ध सैंधव स्थल 'कालीबंगन' का क्षेत्र है, जिसका उत्खनन घग्घर नदी के किनारे हुआ था।
- ऋग्वेद के 7वें मण्डल में वर्णित प्रसिद्ध दशराज्ञ युद्ध परुष्णी (रावी) नदी के तट पर सुदास एवं दस जनों के मध्य लड़ा गया था।
- जाबालोपनिषद् में मानव जीवन के चार प्रमुख आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास) का सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है।
- भारतीय दर्शन परंपरा में सबसे प्राचीन 'सांख्य दर्शन' माना जाता है, जिसके प्रवर्तक महर्षि कपिल थे।
भाग 1: विदेशी यात्रियों के विवरण एवं पुरातात्विक साक्ष्य
प्राचीन भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण में विदेशी यात्रियों के विवरण और पुरातात्विक साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें मुख्य रूप से यूनानी, चीनी व अरबी लेखकों के वृत्तांतों में विभाजित किया जाता है।
1. प्रमुख विदेशी यात्रियों के वृत्तांत
- हेरोडोटस — इन्हें 'इतिहास का पिता' कहा जाता है। इन्होंने अपनी पुस्तक 'हिस्टोरिका' में 5वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व के भारत-फारस संबंधों का वर्णन किया है।
- मेगास्थनीज — यह सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था जो चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। इसने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'इंडिका' में मौर्ययुगीन समाज का वर्णन किया है।
- फाह्यान — यह गुप्त नरेश चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के समय भारत आया था। इसने मध्यदेश के समाज को सुखी व समृद्ध बताया है।
- हेनसांग (युवान च्वांग) — यह हर्षवर्धन के समय लगभग 629 ई. में भारत आया। इसका यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' के नाम से प्रसिद्ध है, जिसमें 138 देशों का विवरण मिलता है।
- अलबरूनी — यह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। इसका पूरा नाम अबूरिहान मुहम्मद-इब्न-अहमद-अलबरूनी था।
2. पुरातात्विक संबंधी साक्ष्य: प्रमुख अभिलेख
| क्र.सं. | अभिलेख का नाम | शासक एवं अभिलेख की विशेषताएं |
|---|---|---|
| 1 | हाथीगुम्फा अभिलेख | कलिंग राज खारवेल (तिथि रहित अभिलेख, सर्वप्रथम 'भारतवर्ष' शब्द का उल्लेख) |
| 2 | जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख | रुद्रदामन (सुदर्शन झील के बारे में जानकारी) |
| 3 | प्रयाग स्तंभ अभिलेख | समुद्रगुप्त (इसकी दिग्विजयों की जानकारी) |
| 4 | बोगजकोई अभिलेख | एशिया माइनर (1400 ई.पू. का सबसे प्राचीन अभिलेख, वैदिक देवता इन्द्र, मित्र, वरुण व नासत्य का उल्लेख) |
भाग 2: सिन्धु घाटी सभ्यता / हड़प्पा संस्कृति
रेडियो carbon C14 के आधार पर सिन्धु सभ्यता की सर्वमान्य तिथि 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू. मानी गई है। यह सभ्यता कांस्य (Bronze) युग से सम्बंधित है। नगरों के निर्माण के लिए यहाँ 'ग्रिड पद्धति' अपनाई गई थी।
सैंधव सभ्यता के प्रमुख स्थल
| वर्ष | उत्खननकर्ता | प्रमुख स्थल | नदी | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| 1921 | दयाराम साहनी | हड़प्पा | रावी | पाकिस्तान (मांटगोमरी जिला) |
| 1922 | राखलदास बनर्जी | मोहनजोदड़ो | सिन्धु | पाकिस्तान (सिन्ध प्रान्त का लरकाना जिला — मुर्दों का टीला) |
| 1953 | बी.बी. लाल एवं बी.के. थापर | कालीbangan | घग्घर | राजस्थान (हनुमानगढ़ जिला) |
| 1955-63 | रंगनाथ राव | लोथल | भोगवा | गुजरात (अहमदाबाद) |
| 1990-91 | रवीन्द्र सिंह बिष्ट | धौलावीरा | मनहर व मानसर | गुजरात (कच्छ) |
हड़प्पा संस्कृति में आयातित वस्तुएं एवं पतन के कारण
- तांबा आयात — हड़प्पावासी तांबा मुख्यतः राजस्थान के खेतड़ी (बलूचिस्तान के साथ) से आयात करते थे।
- सभ्यता का पतन — व्हीलर व गार्डन के अनुसार आर्यों के विनाश के कारण पतन हुआ, जबकि मार्शल, मैके व एस.आर. राव के अनुसार पतन का मुख्य कारण बाढ़ थी।
भाग 3: वैदिक काल (ऋग्वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल)
वैदिक काल को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है— ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) तथा उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई.पू.)। इसके संस्थापक आर्य थे, जिनका मूल निवास स्थान मैक्समूलर ने मध्य एशिया माना है।
1. वैदिक कालीन नदियाँ (प्राचीन एवं आधुनिक नाम)
| क्र.सं. | प्राचीन नाम | वर्तमान / आधुनिक नाम |
|---|---|---|
| 1 | सिन्धु | इंडस या इन्डस |
| 2 | शुतुद्रि | सतलुज |
| 3 | विपाशा | व्यास |
| 4 | परुष्णी | रावी (इसी तट पर प्रसिद्ध दशराज्ञ युद्ध सुदास व दस जनों के बीच लड़ा गया) |
| 5 | अस्किनी | चिनाब |
| 6 | वितस्ता | झेलम |
2. वैदिक काल की महत्वपूर्ण शब्दावली
- गोप्ता — राजा को कहा जाता था।
- गविष्टि / गेसु — युद्ध (गायों की खोज के लिए प्रयुक्त शब्द)।
- अघन्या — गाय (न मारने योग्य पवित्र पशु)।
- वेकनाट — सूदखोर (ऋण देकर भारी ब्याज लेने वाला व्यक्ति)।
3. उत्तर वैदिक व्यवस्था, आश्रम एवं षड्दर्शन
उत्तर वैदिक काल में सर्वप्रथम 'गोत्र' एवं 'आश्रम व्यवस्था' का उल्लेख मिलता है। जाबालोपनिषद् में चार आश्रमों का वर्णन है। इसी काल में आस्तिक षड्दर्शनों का विकास हुआ:
| क्र.सं. | दर्शन का नाम | प्रवर्तक / ऋषि |
|---|---|---|
| 1 | सांख्य दर्शन | महर्षि कपिल (भारतीय दर्शनों में सबसे प्राचीन) |
| 2 | योग दर्शन | महर्षि पतंजलि |
| 3 | न्याय दर्शन | महर्षि गौतम |
| 4 | वेदान्त (उत्तर मीमांसा) | महर्षि बादरायण |
| 5 | मीमांसा (पूर्व मीमांसा) | महर्षि जैमिनी |
| 6 | वैशेषिक दर्शन | महर्षि कणाद |