राजस्थान की अर्थव्यवस्था - उद्योग, MSME व निवेश नीतियाँ
Table of Contents
- राजस्थान — औद्योगिक परिदृश्य
- राजस्थान में उद्योग क्षेत्र
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.)
- मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (एम.एल.यू.पी.वाई.)
- निर्यात
- राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (आर.आई.पी.एस.) 2022
- RIPS-2022 के मुख्य उद्देश्य
- RIPS-2022 के अंतर्गत प्रावधान
- RIPS-2022 के प्रमुख प्रोत्साहन
- निवेश संवर्द्धन ब्यूरो (बी.आई.पी.)
- राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम लिमिटेड (रीको)
- राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (राजसीको)
- राजस्थान वित्त निगम (आर.एफ.सी.)
- आर.एफ.सी. की प्रमुख ऋण योजनाएँ
- एक जिला एक उत्पाद
- खादी एवं ग्रामोद्योग (के.वी.आई.)
- निर्यात संवर्द्धन, प्रक्रिया एवं प्रलेखन/दस्तावेजीकरण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम
- अंतर्राष्ट्रीय विदेशी व्यापार मेलों में भाग लेने पर प्रतिपूर्ति योजना
Key Points
- MSME वर्गीकरण 1 जुलाई 2020 से लागू — सूक्ष्म (1 करोड़/5 करोड़), लघु (10 करोड़/50 करोड़), मध्यम (50 करोड़/250 करोड़)
- RIPS 2022 — 7 अक्टूबर 2022 से लागू — 2027 तक 10 लाख रोजगार का लक्ष्य — 15% वार्षिक वृद्धि दर
- RAJSICO — जून 1961 में स्थापना — जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा में ICD
- मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना — 13 दिसम्बर 2019 से — 5% से 8% ब्याज अनुदान
- RFC — 1955 में स्थापना — 31 मार्च 2024 तक 84,595 इकाइयों को ₹ 8,918 करोड़ ऋण
- निर्यात 2023-24 — ₹ 83,704.24 करोड़ — शीर्ष 5 — इंजीनियरिंग, जवाहरात, धातुएँ, कपड़ा, हस्तशिल्प
राजस्थान — औद्योगिक परिदृश्य
राजस्थान राज्य प्रचुर भौतिक संसाधनों, समृद्ध खनिज सम्पदा, विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प, हथकरचा और उत्कृष्ट कौशल से सम्पन्न है। ये सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक (एम.एस.एम.ई.) इकाइयों के लिए लाभकारी विनिर्माण, प्रसंस्करण गतिविधियों और सेवाओं के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करते हैं जो कि राज्य की ताकत रही है।
राज्य का मुख्य ध्येय राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देना और उन्हें प्रोत्साहित करना तथा उद्यमों द्वारा उच्च क्षमता स्तर प्राप्त करने हेतु सक्षम एवं अनुकूल वातावरण का निर्माण करना है।
राज्य सरकार द्वारा आर्थिक विकास हेतु निर्यात को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचान दी गई है। राजस्थान निर्यात संवर्द्धन परिषद् और निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क (ई.पी.आई.पी.) का विकास ऐसे ही महत्वपूर्ण उपाय हैं।
राजस्थान में उद्योग क्षेत्र
उद्योग क्षेत्र के अंतर्गत खनन एवं उत्खनन, विनिर्माण, विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाएँ तथा निर्माण क्षेत्र शामिल हैं।
- उद्योग क्षेत्र का स्थिर (2011-12) मूल्यों पर सकल मूल्य वर्धन (जी.वी.ए.) वर्ष 2011-12 में ₹ 1.36 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹ 2.33 लाख करोड़ हो गया है — इस अवधि में वार्षिक 4.22 प्रतिशत (सी.ए.जी.आर.) की वृद्धि को दर्शाता है
- प्रचलित मूल्यों पर जी.वी.ए. वर्ष 2011-12 में ₹ 1.36 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹ 4.26 लाख करोड़ हो गया है — इस अवधि में वार्षिक 9.17 प्रतिशत (सी.ए.जी.आर.) की वृद्धि दर्शाता है
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.)
उद्यम वर्गीकरण के नये मानदण्डों के आधार पर 1 जुलाई, 2020 से लागू नये संशोधित वर्गीकरण के अनुसार:
| उद्यम प्रकार | संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश | वार्षिक कारोबार |
|---|---|---|
| सूक्ष्म उद्यम | ₹ 1.00 करोड़ से अधिक नहीं | ₹ 5.00 करोड़ से अधिक नहीं |
| लघु उद्यम | ₹ 10.00 करोड़ से अधिक नहीं | ₹ 50.00 करोड़ से अधिक नहीं |
| मध्यम उद्यम | ₹ 50.00 करोड़ से अधिक नहीं | ₹ 250.00 करोड़ से अधिक नहीं |
मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (एम.एल.यू.पी.वाई.)
- राज्य में विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में नए उद्यम स्थापित करने तथा वर्तमान उद्यमों के विस्तार, आधुनिकीकरण, विविधीकरण के लिए वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ₹ 10 करोड़ तक का ऋण उपलब्ध करवाने हेतु यह योजना अधिसूचित कर 13 दिसम्बर, 2019 से प्रारम्भ की गई
- इस योजनान्तर्गत लघु उद्यमों को ₹ 25 लाख तक के ऋण पर 8 प्रतिशत, ₹ 5 करोड़ तक के ऋण पर 6 प्रतिशत तथा ₹ 10 करोड़ तक के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज पर अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है
निर्यात
- राजस्थान से निर्यात होने वाली शीर्ष पाँच वस्तुओं में इंजीनियरिंग वस्तुएँ, जवाहरात एवं आभूषण, धातुएँ, कपड़ा और हस्तशिल्प वस्तुएँ हैं जिनका राज्य से होने वाले निर्यात में 65 प्रतिशत से अधिक है
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल निर्यात ₹ 83,704.24 करोड़ का हुआ है
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (आर.आई.पी.एस.) 2022
राज्य में तीव्र, स्थायी एवं संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने हेतु राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2019 की और अधिक व्यापक बनाते हुए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2022 को 07 अक्टूबर, 2022 से लागू किया गया है।
RIPS-2022 के मुख्य उद्देश्य
- विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से विकास
- संतुलित और समावेशी क्षेत्रीय विकास
- वर्ष 2027 तक 10 लाख व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन
- हरित हाइड्रोजन, वैकल्पिक ऊर्जा, चिकित्सा उपकरण आदि जैसे नवीन क्षेत्रों को अतिरिक्त प्रोत्साहन
- पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को प्रोत्साहित करना
RIPS-2022 के अंतर्गत प्रावधान
- योजना में 8 प्राथमिक श्रेणियाँ (विनिर्माण; सेवाएँ; सनराईज क्षेत्र; एमएसएमई; स्टार्ट-अप; लॉजिस्टिक्स पार्क, भण्डारण एवं तापमान-नियंत्रित आपूर्ति शृंखला; अनुसंधान एवं विकास और परीक्षण प्रयोगशालाएँ; ऊर्जा संयंत्र) के लिए कस्टमाईड परिलाभ
- थ्रस्ट सेक्टर, सनराईज सेक्टर, पिछड़े क्षेत्रों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, महिला उद्यमियों को अतिरिक्त परिलाभ
- एमएसएमई के लिए अन्य परिलाभों के अतिरिक्त ब्याज अनुदान
RIPS-2022 के प्रमुख प्रोत्साहन
- परिसंपत्ति निर्माण प्रोत्साहन: निवेश सब्सिडी (एसजीएसटी प्रतिपूर्ति) अथवा पूँजी अनुदान अथवा टर्नओवर लिंक इंसेंटिव (टीएलआई) में से चयन करने का विकल्प
- विशेष प्रोत्साहन: रोजगार सृजन पर अतिरिक्त परिलाभ, हरित प्रोत्साहन, क्लस्टर प्रोत्साहन, थर्मल इंजीनियरिंग, प्रशिक्षण एवं कौशल प्रोत्साहन
- छूट: विद्युत शुल्क, मंडी शुल्क, भूमि कर में 7 वर्षों के लिए शत प्रतिशत छूट, स्टाम्प ड्यूटी और रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट एवं 25 प्रतिशत राशि का पुनर्भरण
निवेश संवर्द्धन ब्यूरो (बी.आई.पी.)
- निवेश संवर्द्धन ब्यूरो, राजस्थान की निवेश संवर्द्धन एजेंसी है जो राज्य में बड़े निवेश प्रस्तावों की सुविधा प्रदान करती है
- वर्ष 1991 में अपनी स्थापना के समय से ही सरकार एवं निवेशकों के मध्य मुद्दों के त्वरित समाधान हेतु बी.आई.पी. एक इंटरफेस की तरह कार्य कर रहा है
- बी.आई.पी. के मुख्य अध्यक्षता में गठित राज्य सर्वाधिकार प्राप्त समिति (स्टेट एम्पावर्ड कमेटी) के लिए सचिवालय के रूप में कार्य करता है
- स्टेट एम्पावर्ड कमेटी द्वारा अनुशंसित परियोजनाओं को बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट स्वीकृति प्रदान करता है
राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम लिमिटेड (रीको)
- रीको, राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने वाली शीर्ष संस्था है
- यह राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी मदद करता है
राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (राजसीको)
- राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड की स्थापना लघु उद्योगों को सहायता प्रदान करने तथा कारीगरों की और उनके उत्पादों के विपणन में सुविधा प्रदान करने के लिए जून, 1961 में की गई
- निगम राज्य के समृद्ध हस्तशिल्प को उत्थान और बढ़ावा देने के उद्देश्य से कल्याणकारी योजनाएँ भी तैयार करता है
- निगम द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है
- निगम जयपुर, जोधपुर और भीलवाड़ा में स्थित शुष्क बंदरगाहों (इनलैण्ड कंटेनर डिपो) के माध्यम से राजस्थान के निर्यातकों/आयातकों को निर्यात आधारभूत सेवाएँ प्रदान कर रहा है
- इसके अतिरिक्त निगम द्वारा हवाई मार्ग से आयात-निर्यात की सुविधाएँ सांगानेर एयरपोर्ट, जयपुर में स्थित एयर कार्गो कॉम्पलेक्स के माध्यम से प्रदान की जा रही हैं
राजस्थान वित्त निगम (आर.एफ.सी.)
- राजस्थान वित्त निगम (आर.एफ.सी.) की स्थापना वर्ष 1955 में एम.एस.एम.ई. इकाइयों को औद्योगिक परियोजनाओं हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी
- राजस्थान वित्त निगम ने इसकी स्थापना से 31 मार्च, 2024 तक 84,595 इकाइयों को ₹ 8,918 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया है
आर.एफ.सी. की प्रमुख ऋण योजनाएँ
- सामान्य परियोजना ऋण योजना
- सेवा क्षेत्र हेतु योजना
- वाणिज्यिक रियल एस्टेट सेक्टर (सी.आर.ई.) हेतु योजना
- एकल खिड़की योजना (₹ 200 लाख तक परियोजना लागत की लघु एवं एसएसआई इकाइयों के लिए)
- अर्हता प्राप्त पेशेवरों हेतु योजना
- फाइनेन्सिंग अगेन्स्ट एसेट्स योजना
- स्विच ओवर ऋण योजना
- सरल योजना
- एम.एस.एम.ई. के वर्तमान ऋणियों हेतु टॉप-अप ऋण योजना
- सौर ऊर्जा परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए योजना
- रीको द्वारा औद्योगिक इकाइयों, होटल एवं अस्पतालों के लिए आवंटित भूमि पर वित्त पोषण हेतु ऋण योजना
- आयात लाइसेन्स वाली मार्बल प्रसंस्करण इकाइयों के लिए विशेष ऋण योजना
- युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना (वाई.यू.पी.वाई.)
- निगम द्वारा परामर्श सेवाएँ
- किराये के परिसर में स्थापित उद्योगों को ऋण योजना
एक जिला एक उत्पाद
इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जिले से निर्यात क्षमता वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान करना और उन्हें बढ़ावा देना और प्रत्येक जिले को एक संभावित निर्यात केन्द्र के रूप में बदलना है।
खादी एवं ग्रामोद्योग (के.वी.आई.)
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की स्थापना असंगठित क्षेत्र के कारीगरों को रोजगार प्रदान करने, उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादों के उत्पादन में सहकरता प्रदान करने, दस्तकारों को प्रशिक्षण प्रदान करने और आत्मनिर्भरता की भावना जागृत करने के लिए की गई है। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में खादी तथा ग्रामोद्योग के माध्यम से स्वरोजगार उपलब्ध कराने में राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
निर्यात संवर्द्धन, प्रक्रिया एवं प्रलेखन/दस्तावेजीकरण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम
- राज्य के निर्यातकों की निर्यात संबंधी कठिनाइयों के समाधान एवं उन्हें निर्यात प्रक्रियाओं एवं दस्तावेजीकरण संबंधी प्रशिक्षण प्रदान कराये जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा राजस्थान निर्यात संवर्द्धन परिषद् (आर.ई.पी.सी.) की स्थापना की गई है
- नियातकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना 2012 में प्रारंभ की गई
अंतर्राष्ट्रीय विदेशी व्यापार मेलों में भाग लेने पर प्रतिपूर्ति योजना
- यह योजना 2012-13 से लागू की गई है — वर्तमान में इस योजना को नवीन दिशा-निर्देशों के साथ 31 मार्च, 2025 तक बढ़ाया गया है
- इस योजना की क्रियान्वयन एजेंसी राजस्थान निर्यात संवर्द्धन परिषद् (आर.ई.पी.सी.) है
- योजनान्तर्गत विदेशों में आयोजित होने वाले अनुमोदित व्यापार मेलों में भाग लेने वाली इकाइयों को उनके द्वारा भुगतान किए गए भूमि किराए का 50 प्रतिशत अधिकतम ₹ 1.00 लाख की दर से पुनर्भरण किया जाता है
- विदेशों में आयोजित मेलों/प्रदर्शनियों में राज्य की ओर से प्रतिनिधिमंडल भेजने के लिए राजस्थान निर्यात संवर्द्धन परिषद् को ₹ 10.00 लाख का पृथक से आवंटन किया गया है