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मानव शरीर के प्रमुख अंग तंत्र (पाचन... विटामिन्स एवं खनिज: रासायनिक नाम, स... मानव रोग एवं उनके उत्तरदायी कारक (व... आनुवंशिकी (Genetics), DNA एवं RNA स... Title: पादप आकारिकी (Plant Morpholo... न्यूटन के गति के नियम (Newton's Law... प्रकाश की प्रकृति, परावर्तन, अपवर्त... ध्वनी का सिद्धांत: तरंग गति, डॉपलर... आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic... प्रमुख रासायनिक यौगिकों के व्यापारि... दैनिक जीवन में रसायन: अम्ल, क्षार,... भारत के मिसाइल सिस्टम एवं रक्षा प्र... इसरो (ISRO) के अंतरिक्ष मिशन एवं अं... भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम एवं... अंतर्राष्ट्रीय रक्षा समझौते, प्रमुख... ओजोन परत क्षरण: कारण, प्रभाव और मॉन... जलवायु परिवर्तन (Climate Change): प... अल नीनो (El Niño) एवं ला नीना (La N...

मानव शरीर के प्रमुख अंग तंत्र (पाचन, परिसंचरण, श्वसन, उत्सर्जन, तंत्रिका और कंकाल तंत्र)

1 min read 32 views 06 Jul 2026 General Science
मानव शरीर के 6 प्रमुख अंग तंत्रों - पाचन, परिसंचरण, श्वसन, उत्सर्जन, तंत्रिका और कंकाल तंत्र की विस्तृत जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए।
Key Points
  • मानव शरीर में 6 प्रमुख अंग तंत्र होते हैं जो विशिष्ट कार्य करते हैं
  • पाचन तंत्र में यकृत सबसे बड़ी ग्रंथि है और पित्त का निर्माण करता है
  • हृदय 4 कक्षीय होता है और रक्त परिसंचरण के लिए पंप का काम करता है
  • श्वसन तंत्र में गैसीय विनिमय वायुकोशिकाओं में होता है
  • वयस्क मानव में कुल 206 अस्थियां होती हैं और फीमर सबसे लंबी अस्थि है

मानव शरीर के प्रमुख अंग तंत्र

मानव शरीर एक जटिल संरचना है जो विभिन्न अंग तंत्रों से मिलकर बनी है। प्रत्येक अंग तंत्र एक विशिष्ट कार्य करता है और सभी मिलकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, BPSC, MPPSC, UPPSC, RPSC RAS/SI) में इन अंग तंत्रों से संबंधित गहराई वाले प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

1. पाचन तंत्र (Digestive System)

मुख्य अंग एवं ग्रंथियाँ:

  • मुंह: पाचन की शुरुआत यहीं से होती है। लार में टायलिन (Amylase) एंजाइम कार्बोहाइड्रेट को पचाता है तथा लाइसोजाइम (Lysozyme) जीवाणुओं को नष्ट करता है।
  • ग्रसनी (Pharynx): यह भोजन और वायु दोनों का सामान्य मार्ग है।
  • ग्रासनली (Esophagus): पेरिस्टालसिस (क्रमानुकुंचन) गति द्वारा भोजन को पेट तक पहुंचाती है।
  • आमाशय (Stomach): इसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) का स्राव होता है। यहाँ प्रोटीन पाचन के लिए पेप्सिन तथा दूध के पाचन के लिए रेनिन एंजाइम निकलते हैं। श्लेष्मा (Mucus) की परत पेट की दीवार को अम्ल से बचाती है।
  • छोटी आंत (Small Intestine): इसके तीन भाग (ड्युओडिनम, जेजुनम, इलियम) होते हैं। यह भोजन के पाचन का मुख्य स्थल है तथा भोजन का अवशोषण अंगुली जैसे उभार विलाई (Villi) द्वारा यहीं होता है।
  • बड़ी आंत (Large Intestine): मुख्य रूप से जल और खनिजों का अवशोषण करती है तथा मल का निर्माण करती है।
  • यकृत (Liver): यह मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। यह पित्त रस (Bile Juice) का निर्माण करती है (जो वसा का इमल्सीकरण करता है) तथा अमोनिया को यूरिया में बदलती है।
  • पिताशय (Gall Bladder): यकृत द्वारा बनाए गए पित्त रस का संचय करता है।
  • अग्न्याशय (Pancreas): यह एक मिश्रित ग्रंथि है जो पूर्ण पाचक रस (ट्रिप्सिन, एमाइलेज, लाइपेज) का स्राव करती है।

पाचन प्रक्रिया:

भोजन का पाचन मुंह से शुरू होकर छोटी आंत में पूरा होता है। कार्बोहाइड्रेट का आंशिक पाचन मुंह में, प्रोटीन का पेट में और वसा का पूर्ण पाचन छोटी आंत में होता है। पित्त रस में कोई एंजाइम नहीं होता, यह केवल वसा को छोटी-छोटी बूंदों में तोड़ता है।

2. परिसंचरण तंत्र (Circulatory System)

मुख्य घटक:

  • हृदय: यह मानव शरीर का केंद्रीय पंपिंग अंग है जो 4 कक्षीय (दो अलिंद और दो निलय) होता है।
  • रक्त वाहिकाएं:
    धमनी (Artery): शुद्ध रक्त ले जाती है (अपवाद: पल्मोनरी धमनी जो अशुद्ध रक्त फेफड़ों में ले जाती है)।
    शिरा (Vein): अशुद्ध रक्त लाती है (अपवाद: पल्मोनरी शिरा जो शुद्ध रक्त बाएं अलिंद में लाती है)।
    केशिकाएं (Capillaries): गैसों और पोषक तत्वों का विनिमय करती हैं।
  • रक्त (Blood): यह एक तरल संयोजी ऊतक है जिसका pH मान 7.4 (हल्का क्षारीय) होता है। इसमें प्लाज्मा (55%) और रक्त कोशिकाएं — RBC, WBC, प्लेटलेट्स (45%) शामिल हैं।

हृदय की संरचना और कक्षों के कार्य:

कक्ष (Chamber)विशिष्ट कार्य
दाहिना अलिंद (Right Atrium)महाशिरा द्वारा पूरे शरीर से अशुद्ध (CO2 युक्त) रक्त प्राप्त करना।
दाहिना निलय (Right Ventricle)अशुद्ध रक्त को शुद्ध होने के लिए पल्मोनरी धमनी द्वारा फेफड़ों में भेजना।
बायां अलिंद (Left Atrium)फेफड़ों से शुद्ध (Oxygenated) रक्त पल्मोनरी शिरा द्वारा प्राप्त करना।
बायां निलय (Left Ventricle)सबसे मजबूत कक्ष, जो शुद्ध रक्त को महाधमनी (Aorta) द्वारा पूरे शरीर में पंप करता है।

हृदय के वाल्व और कार्य:

दाहिने अलिंद और निलय के बीच त्रिकपर्दी (Tricuspid) वाल्व तथा बाएं अलिंद और निलय के बीच द्विकपर्दी या मिट्रल (Bicuspid) वाल्व होता है, जो रक्त को वापस उलटा बहने से रोकते हैं। धड़कन के समय 'लव-डब' (Lubb-Dupp) की ध्वनि इन्हीं कपाटों के बंद होने से आती है। हृदय की धड़कन दाहिने अलिंद में स्थित S.A. नोड (Sinoatrial Node) से उत्पन्न होती है, जिसे प्राकृतिक पेसमेकर कहते हैं।

रक्त के कार्य:

ऑक्सीजन ($O_2$) का हीमोग्लोबिन के माध्यम से और कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) का बाइकार्बोनेट के रूप में परिवहन करना, पोषक तत्वों का वितरण, संक्रमण से सुरक्षा (WBC द्वारा), रक्तस्राव रोकना (प्लेटलेट्स द्वारा थक्का बनाकर) और शरीर के तापमान का नियंत्रण करना।

3. श्वसन तंत्र (Respiratory System)

मुख्य अंग:

  • नासिका (Nose): हवा का प्रवेश द्वार, जहाँ श्लेष्मा और बाल हवा को फिल्टर व नम करते हैं।
  • ग्रसनी और स्वरयंत्र (Larynx): हवा का मार्ग, स्वरयंत्र को 'वॉइस बॉक्स' भी कहा जाता है। भोजन निगलते समय एपिग्लोटिस (Epiglottis) श्वासनली को ढक देता है।
  • श्वासनली (Trachea): यह हवा को फेफड़ों तक ले जाती है। यह पिचके नहीं, इसलिए इस पर हाइलाइन उपास्थि से बने C-आकार के छल्ले होते हैं।
  • ब्रोंकाई और ब्रोंकियोल्स: श्वासनली की विभाजित शाखाएं जो फेफड़ों के अंदर फैलती हैं।
  • फेफड़े (Lungs): स्पंजी संरचना, जहाँ गैसों का मुख्य विनिमय होता है।
  • वायुकोशिकाएं (Alveoli): फेफड़ों की कार्यात्मक इकाई तथा गैसीय विनिमय की मुख्य स्थल।

श्वसन प्रक्रिया:

श्वसन में अंतःश्वसन (Inspiration - हवा अंदर लेना) और उच्छ्वसन (Expiration - हवा बाहर छोड़ना) शामिल है। डायाफ्राम और पसलियों की पेशियों की गति से फेफड़ों में दबाव बदलता है जिससे हवा का आना-जाना होता है। वायुकोशिकाओं की पतली झिल्ली से विसरण (Diffusion) विधि द्वारा ऑक्सीजन रक्त में प्रवेश करती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से बाहर निकलती है।

4. उत्सर्जन तंत्र (Excretory System)

मुख्य अंग:

  • वृक्क (Kidneys): मुख्य उत्सर्जी अंग, जो रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर बीन्स के आकार के होते हैं।
  • मूत्रवाहिका (Ureter): वृक्क से मूत्र को मूत्राशय तक ले जाने वाली नलिका।
  • मूत्राशय (Urinary Bladder): पेशीय थैली जो मूत्र का अस्थायी संग्रह करती है।
  • मूत्रमार्ग (Urethra): शरीर से मूत्र का बाहर निष्कासन करने वाला मार्ग।

वृक्क की संरचना एवं कार्य:

प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख सूक्ष्म नलिकाएं होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन (Nephron) कहते हैं। नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है। इसमें ग्लोमेरुलस (रक्त छानने का गुच्छा), बोमन कैप्सूल, हेनले लूप और संग्रह नलिका शामिल हैं। पीयूष ग्रंथि से निकलने वाला ADH (एंटी-ड्यूरेटिक हार्मोन) हेनले लूप में जल के पुनरावशोषण को नियंत्रित करता है।

मूत्र निर्माण के तीन चरण:

  1. परानिस्यंदन (Ultrafiltration): ग्लोमेरुलस में उच्च रक्त दबाव के कारण रक्त में से पानी, यूरिया, ग्लूकोज आदि छनकर बोमन कैप्सूल में आते हैं।
  2. चयनात्मक पुनः अवशोषण (Reabsorption): छने हुए द्रव में से उपयोगी तत्व जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल और अधिकांश जल नेफ्रॉन की नलिकाओं द्वारा रक्त में वापस सोख लिए जाते हैं।
  3. स्राव (Secretion): अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त आयन सीधे मूत्र नलिका में स्रावित कर दिए जाते हैं। मूत्र का पीला रंग उसमें उपस्थित यूरोक्रोम (Urochrome) रंजक के कारण होता है।

5. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)

विभाजन:

  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS): इसके अंतर्गत मस्तिष्क (Brain) और मेरुदंड (Spinal Cord) आते हैं।
  • परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS): मस्तिष्क से निकलने वाली कपाल तंत्रिकाएं और मेरुदंड से निकलने वाली मेरु तंत्रिकाएं।
  • स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ANS): अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण। इसके दो भाग होते हैं — अनुकंपी (आपातकाल में हृदय गति बढ़ाना) और परानुकंपी (स्थिति को पुनः सामान्य करना)।

मस्तिष्क के प्रमुख भाग एवं कार्य:

भाग का नामनियंत्रण एवं मुख्य कार्य
सेरेब्रम (प्रमस्तिष्क)मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग; चेतना, बुद्धि, सोचना, तर्कशक्ति, इच्छाशक्ति और स्मृति का केंद्र।
सेरेबेलम (अनुमस्तिष्क)शरीर का संतुलन बनाए रखना, ऐच्छिक मांसपेशियों के समन्वय का नियंत्रण करना।
मेडुला ऑब्लांगेटाअनैच्छिक क्रियाओं जैसे श्वसन दर, हृदय गति, रक्तदाब और निगलने-उगलने का नियंत्रण।
हाइपोथैलेमसभूख, प्यास, प्यार, नफरत, शरीर के तापमान और अंतःस्रावी ग्रंथियों (हार्मोन) का नियंत्रण केंद्र।

न्यूरॉन (Neurone):

तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) है। इसमें कोशिका काय (Cyton), संदेश प्राप्त करने वाले डेंड्राइट्स (Dendrites) और संदेश ले जाने वाला लंबा एक्सॉन (Axon) होता है। दो न्यूरॉन्स के बीच के खाली स्थान को सिनैप्स (Synapse) कहते हैं, जहाँ तंत्रिका आवेग एसिटाइलकोलीन नामक रसायन (न्यूरोट्रांसमीटर) द्वारा इलेक्ट्रो-केमिकल संकेतों के रूप में संचारित होते हैं। मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को EEG (Electroencephalogram) द्वारा मापा जाता है।

6. कंकाल तंत्र (Skeletal System)

मुख्य घटक:

  • अस्थियां (Bones): वयस्क मनुष्य के शरीर में कुल 206 अस्थियां होती हैं (नवजात शिशुओं में लगभग 300)। हड्डियों में ओसीन (Ossein) प्रोटीन और कैल्शियम फॉस्फेट पाया जाता है।
  • उपास्थि (Cartilage): हड्डियों के जोड़ों पर पाई जाने वाली लचीली व चिकनी सुरक्षा परत।
  • स्नायु (Ligament): घने रेशेदार ऊतक जो अस्थि को अस्थि से (Bone to Bone) जोड़ते हैं।
  • कंडरा (Tendon): मजबूत रेशेदार ऊतक जो मांसपेशी को अस्थि से (Muscle to Bone) जोड़ते हैं।

अस्थियों का विभाजन (कंकाल के प्रकार):

  • अक्षीय कंकाल (Axial Skeleton - 80 हड्डियाँ): इसमें खोपड़ी (29 हड्डियाँ), कशेरुक दंड/रीढ़ की हड्डी (वयस्क में 26, बच्चों में 33), पसलियाँ (24 अर्थात् 12 जोड़ी) और छाती की बीच की हड्डी (स्टर्नम - 1) शामिल हैं। पसलियों की अंतिम दो जोड़ियों (11वीं और 12वीं) को 'तैरती हुई पसलियाँ' (Floating Ribs) कहते हैं।
  • उपांगी कंकाल (Appendicular - 126 हड्डियाँ): इसमें हाथ और पैर की हड्डियाँ (60 + 60 = 120) तथा मेखलाएँ (Girdles - 6 हड्डियाँ) शामिल हैं।

जोड़ों के प्रमुख प्रकार:

जोड़ का प्रकार (Joint)गति की सीमाशरीर में मुख्य उदाहरण
अचल जोड़ (Fibrous Joint)कोई गति नहीं होतीखोपड़ी की अस्थियों के बीच के जोड़ (Sutures)
अल्प गतिशील (Cartilaginous)सीमित या कम गतिकशेरुकाओं (रीढ़ की हड्डियों) के बीच के जोड़
कंदुक-खल्तिका (Ball & Socket)सभी दिशाओं में पूर्ण गतिकंधे का जोड़ (Shoulder) और कूल्हे का जोड़ (Hip Joint)
कब्जा संधि (Hinge Joint)केवल एक ही दिशा में गति (दरवाजे की तरह)कोहनी (Elbow) और घुटने (Knee) का जोड़
धुराग्र संधि (Pivot Joint)घूर्णन गति (Rotational)गर्दन की प्रथम कशेरुका (एटलस) और खोपड़ी का जोड़

अस्थियों के कार्य:

शरीर को निश्चित आकार और आधार देना, कोमल आंतरिक अंगों (हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क) की सुरक्षा करना, मांसपेशियों के साथ मिलकर गति में सहायता करना, लाल अस्थि मज्जा (Red Bone Marrow) में रक्त कोशिकाओं (RBC, WBC) का निर्माण करना तथा कैल्शियम और फॉस्फोरस का भंडारण करना।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य:

  • सबसे लंबी और भारी अस्थि: फीमर (Femur) — जांघ की अस्थि
  • सबसे छोटी अस्थि: स्टेप्स (Stapes) — मध्य कान की अस्थि
  • सबसे बड़ी ग्रंथि: यकृत (Liver) — इसका वजन लगभग 1.5 किग्रा होता है
  • सबसे लंबी कोशिका: न्यूरॉन (Neon/तंत्रिका कोशिका)
  • शरीर का सबसे कठोर भाग: दाँतों का इनेमल (Enamel) — जो कैल्शियम फॉस्फेट का बना होता है
  • स्वस्थ मनुष्य का हृदय स्पंदन दर: 72 बार प्रति मिनट, तथा सामान्य रक्तदाब 120/80 mm Hg होता है
  • सामान्य वयस्क की श्वसन दर: 16-20 बार प्रति मिनट, जिसे स्पाइरोमीटर से मापा जाता है
  • किडनी खराब होने पर उपचार: कृत्रिम वृक्क विधि अर्थात् हीमोडायलिसिस (Dialysis) तकनीक का प्रयोग किया जाता है
  • रीढ़ की हड्डी में ग्रीवा (गर्दन) कशेरुकाओं की संख्या: 7 होती है (यह संख्या मनुष्य और जिराफ दोनों में समान है)
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