वायुमण्डल, पवनें, जलमण्डल, महासागरीय धाराएँ व जलसन्धियाँ
Table of Contents
- भाग 1: वायुमण्डल का संगठन, संरचना एवं सूर्यातप
- 1. वायुमण्डल का गैस संगठन (50 किमी. की ऊँचाई तक)
- 2. वायुमण्डलीय परतें (Atmospheric Layers)
- 3. सूर्यातप (Insolation) एवं तापमान का प्रतिलोमन
- भाग 2: वायुदाब पेटियाँ एवं विश्व की प्रमुख पवनें
- 1. वायुदाब की पेटियाँ (Pressure Belts)
- 2. विश्व की प्रमुख स्थानीय पवनें (Local Winds)
- भाग 3: आर्द्रता, बादल, वर्षण एवं चक्रवात
- 1. आर्द्रता (Humidity) एवं संघनन
- 2. चक्रवात (Cyclones) एवं प्रतिचक्रवात (Anti-Cyclone)
- भाग 4: जलमण्डल (Hydrosphere) — गर्त, धाराएँ एवं लवणता
- 1. महासागरीय गर्त (Oceanic Deeps)
- 2. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents)
- 3. महासागरीय लवणता (Salinity)
- भाग 5: विश्व की 30 प्रमुख जलसन्धियाँ (Straits)
Key Points
- मौसम संबंधी अधिकांश परिवर्तन वायुमण्डल की सबसे निचली परत क्षोभमण्डल (Troposphere) में घटित होते हैं.
- समतापमण्डल (Stratosphere) में 10 से 50 किमी. की ऊँचाई के बीच ओजोन गैस की परत पाई जाती है, जो पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है.
- रॉकी पर्वत श्रृंखला के पूर्वी ढालों पर चलने वाली गर्म व शुष्क हवा को चिनूक और सहारा मरुस्थल की शुष्क पवन को हरमट्टन (डॉक्टर हवा) कहा जाता है.
- चक्रवात के केंद्र में हमेशा निम्न वायुदाब (Low Pressure) होता है, जिसके कारण हवाएँ बाहर से भीतर की ओर चक्राकार मार्ग में चलती हैं.
- प्रशान्त महासागर में स्थित मेरियाना गर्त (11,033 मीटर) पूरे विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त है.
- गल्फ स्ट्रीम प्रशान्त नहीं बल्कि अटलांटिक महासागर की एक मुख्य गर्म जलधारा है, जबकि हम्बोल्ट धारा प्रशांत महासागर की ठंडी धारा है.
- विश्व में सर्वाधिक लवणता टर्की की वान झील (330‰) में पाई जाती है और समुद्री जल की औसत लवणता 35‰ होती है.
- भारत और श्रीलंका को पृथक करने वाली जलसन्धि पाक जलसन्धि है, जबकि अलास्का और रूस के बीच बेरिंग जलसन्धि स्थित है.
भाग 1: वायुमण्डल का संगठन, संरचना एवं सूर्यातप
वायुमण्डलीय घटना के अध्ययन को मौसम विज्ञान कहा जाता है. वायुमण्डल का विस्तार सागर तल से 90 किमी. से 1,000 किमी. की ऊँचाई तक पाया जाता है. वायुमण्डल में जलवाष्प की मात्रा इसके कुल आयतन का 4 से 5 प्रतिशत होती है (ध्रुवीय क्षेत्रों में 1% तथा उष्ण-आर्द्र प्रदेशों में 4%).
1. वायुमण्डल का गैस संगठन (50 किमी. की ऊँचाई तक)
| गैस का नाम | प्रतिशत आयतन | गैस का नाम | प्रतिशत आयतन |
|---|---|---|---|
| नाइट्रोजन (N2) | 78.03% | निऑन | 0.0018% |
| ऑक्सीजन (O2) | 20.99% | हीलीयम | 0.0005% |
| ऑर्गन (Ar) | 0.93% | क्रिप्टॉन | 0.0001% |
| कार्बन-डाई-ऑक्साइड (CO2) | 0.03% | जिनॉन | 0.000,005% |
| हाइड्रोजन (H2) | 0.01% | ओजोन (O3) | 0.000,0001% |
वायुदाब मापन बैरोमीटर की सहायता से किया जाता है तथा जलवायु वैज्ञानिकों द्वारा इसकी इकाई को 'मिलीबार' कहा जाता है. एक मिलीबार एक वर्ग सेण्टीमीटर क्षेत्रफल पर एक ग्राम भार के बल के बराबर होता है.
2. वायुमण्डलीय परतें (Atmospheric Layers)
- क्षोभमण्डल या अधोमण्डल (Troposphere) — यह 12 किमी. की ऊँचाई तक फैला है. इसमें ऊँचाई बढ़ने पर प्रति 165 मीटर पर 1°C तापमान कम होता है (तापमान 17°C से घटकर -53°C हो जाता है). मौसम सम्बन्धी अधिकांश परिवर्तन (आँधी, बादल, वर्षा) इसी में होते हैं. संवहन धाराओं की उपस्थिति के कारण इसे संवहन मण्डल भी कहते हैं. इसकी ऊपरी सीमा को क्षोभ सीमा (Tropopause) कहा जाता है.
- समतापमण्डल (Stratosphere) — यह 12 किमी. से 50 किमी. की ऊँचाई तक फैला है. इसमें 10 से 50 किमी. की ऊँचाई तक ओजोन गैस विद्यमान है (ओजोन मण्डल), जो सर्वाधिक सघन 22 किमी. की ऊँचाई पर है. यह हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करती है. इसमें तापमान -53°C से बढ़कर 7°C हो जाता है. यहाँ आँधी, वर्षा, बादल न होने के कारण यह भाग शान्त रहता है.
- मध्यमण्डल (Mesosphere) — यह 50 किमी. से 80 किमी. तक फैला है, जहाँ ऊँचाई के साथ तापमान में ह्रास होता है और 80 किमी. की ऊँचाई पर तापमान -100°C हो जाता है.
- आयनमण्डल या तापमण्डल (Ionosphere / Thermosphere) — यह 80 किमी. से 500 किमी. तक फैला है, जहाँ तापमान -93°C से बढ़कर 427°C हो जाता है. इसमें सूर्य की एक्स-किरणों व पराबैंगनी किरणों द्वारा वायु आयनित (Ionised) हो जाती है. पृथ्वी से प्रेषित रेडियो तरंगें इसी मण्डल से परावर्तित होकर वापस आती हैं.
- बाह्य मण्डल (Exosphere) — यह 640–1000 किमी. के मध्य स्थित है, जहाँ विद्युत आवेशित कणों की प्रधानता होती है तथा नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम व हाइड्रोजन की अलग-अलग परतें होती हैं.
3. सूर्यातप (Insolation) एवं तापमान का प्रतिलोमन
- सूर्यातप — पृथ्वी द्वारा प्राप्त सौर विकिरण को सूर्यातप कहते हैं, जो लघु तरंगों के रूप में पहुँचती है. ऊष्मा की कुल 100 इकाइयों में से 35 इकाइयाँ धरातल पर पहुँचने से पहले ही अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाती हैं (6 इकाइयाँ वायुमण्डल की ऊपरी परत से, 27 इकाइयाँ बादलों से तथा 2 इकाइयाँ पृथ्वी के धरातल से). किसी भी सतह से परावर्तित होने वाली सूर्यातप की मात्रा के अनुपात को एल्बीडो कहते हैं (पृथ्वी का एल्बीडो 35 है). पृथ्वी का औसत तापमान 15°C है. पूर्वी साइबेरिया में स्थित बर्खोयांस्क को पृथ्वी का शीत ध्रुव कहा जाता है.
- तापमान का प्रतिलोमन (Temperature Inversion) — सामान्यतः ऊँचाई के साथ तापमान घटता है, परन्तु इसके विपरीत स्थिति (ऊँचाई के साथ तापमान का बढ़ना) को तापीय प्रतिलोमन कहते हैं, जो पर्वतीय क्षेत्रों में ढालों पर ठंडी हवा के नीचे बैठने से होता है.
भाग 2: वायुदाब पेटियाँ एवं विश्व की प्रमुख पवनें
1. वायुदाब की पेटियाँ (Pressure Belts)
पृथ्वी के धरातल पर वायुदाब की पेटियों को दो भागों— ताप जनित तथा गति जनित में विभाजित किया जाता है:
- विषुवतरेखीय निम्न वायुदाब की पेटी (ताप जनित) — यह विषुवत रेखा से 10° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के मध्य स्थित है, जहाँ संवहन धाराओं के कारण क्षैतिज प्रवाह नहीं होता; इसे 'शान्त पेटी' या **डोलड्रम** कहते हैं.
- उपोष्ण उच्च वायुदाब की पेटी (गति जनित) — यह दोनों गोलार्द्धों में 35° अक्षांशों के निकट स्थित है, जहाँ विषुवत रेखा से उठी हवाएँ नीचे उतरती हैं। इसे **अश्व अक्षांश (Horse Latitude)** भी कहते हैं.
- उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की पेटियाँ (गति जनित) — ये दोनों गोलार्द्धों में आर्कटिक और अंटार्कटिक वृत्तों से 45° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों तक विस्तृत हैं.
- ध्रुवीय उच्च वायुदाब की पेटियाँ (ताप जनित) — ध्रुवों के निकट निम्न तापमान के कारण यहाँ वायुदाब सदैव उच्च रहता है.
मानचित्र पर समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली कल्पित रेखाओं को समदाब रेखाएँ (Isobars) कहते हैं. पृथ्वी के घूर्णन के कारण हवाएँ मूल दिशा से विक्षेपित हो जाती हैं, इसे कॉरिऑलिस प्रभाव या कॉरिऑलिस बल कहते हैं। इसके कारण उत्तरी गोलार्द्ध की पवनें अपनी दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध की पवनें अपनी बाईं ओर विक्षेपित होती हैं, इसे **फेरल का नियम** कहते हैं.
2. विश्व की प्रमुख स्थानीय पवनें (Local Winds)
| पवन का नाम | प्रकृति / स्वरूप | प्रभावित मुख्य भौगोलिक क्षेत्र / देश |
|---|---|---|
| चिनूक (Chinook) | गर्म एवं शुष्क | रॉकी पर्वत के पूर्वी ढाल के सहारे चलने वाली (संयुक्त राज्य अमेरिका). |
| फ़ॉन (Foehn) | गर्म एवं शुष्क | आल्प्स पर्वत के उत्तरी ढाल से नीचे उतरने वाली हवा (स्विट्जरलैंड). |
| सिराँक्को (Sirocco) | गर्म एवं शुष्क | सहारा मरुस्थल से भूमध्य सागर की ओर चलने वाली (मिस्र में खमसिन, लीबिया में गिबली, ट्यूनीशिया में चिली, इटली में सिराँक्को). |
| हरमट्टन (Harmattan) | गर्म एवं शुष्क | सहारा रेगिस्तान से उत्तर-पूर्व दिशा में चलने वाली (गिनी तट पर डॉक्टर हवा). |
| ब्रिकफील्डर / सांता अना | गर्म एवं शुष्क | ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रान्त में / द. कैलिफ़ोर्निया राज्य (USA) में. |
| नॉरवेस्टर (Norwester) | गर्म एवं शुष्क | न्यूजीलैंड में उच्च पर्वतों से उतरने वाली हवा (तथा भारत का कालवैशाखी). |
| ब्लैक रोलर / शामल | गर्म एवं शुष्क | वृहत् मैदान (उ. अमेरिका) के द. पश्चिम भाग में / मेसोपोटामिया (इराक) व फारस की खाड़ी. |
| मिस्ट्रल (Mistral) / बोरा | ठंडी हवा | रोनघाटी (फ्रांस) में जाड़े में चलने वाली / यूगोस्लाविया के एड्रियाटिक तट पर. |
| पैम्पैरो (Pampero) | ठंडी हवा | अर्जेन्टीना तथा उरुग्वे के पम्पास क्षेत्र में चलने वाली तीव्र ध्रुवीय हवा. |
| ब्लिजार्ड (Blizzard) | अत्यंत ठंडी हवा | ध्रुवीय पवन जो हिम कणों से युक्त होती है (साइबेरिया एवं उत्तरी अमेरिका). |
भाग 3: आर्द्रता, बादल, वर्षण एवं चक्रवात
1. आर्द्रता (Humidity) एवं संघनन
- निरपेक्ष, सापेक्ष व विशिष्ट आर्द्रता — वायु के प्रति इकाई आयतन में विद्यमान जलवाष्प की मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता (ग्राम प्रति घनमीटर) कहते हैं. किसी भी तापमान पर वायु में उपस्थित जलवाष्प तथा उसी तापमान पर वायु की आर्द्रता सामर्थ्य के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता (%) कहते हैं. वायु के प्रति इकाई भार में जलवाष्प के भार को विशिष्ट आर्द्रता (ग्राम प्रति किलोग्राम) कहा जाता है. जल के गैसीय अवस्था से द्रव अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं. ओस, पाला, कुहरा, कुहासा, बादल इसके विभिन्न रूप हैं. वायु जिस तापमान पर संतृप्त होती है उसे ओसांक (Dew Point) कहते हैं.
- वर्षण के प्रकार:
- संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall) — धरातल के अत्यधिक गर्म होने के फलस्वरूप संवहन धाराओं द्वारा होने वाली वर्षा, जो विषुवतीय क्षेत्रों में मुसलाधार होती है.
- चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic Rainfall) — चक्रवातों के कारण दो विपरीत वायुराशियों (शीतोष्ण कटिबन्ध) के मिलने से होने वाली वर्षा, जो उत्तरी भारत में शीतकाल में होती है.
- पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall) — गर्म और आर्द्र वायु जब पर्वत श्रेणी जैसे अवरोधों से टकराकर ऊपर उठती है तो वर्षा होती है। पर्वत के पीछे का भाग 'वृष्टि-छाया क्षेत्र' (Rain-shadow zone) कहलाता है.
2. चक्रवात (Cyclones) एवं प्रतिचक्रवात (Anti-Cyclone)
- चक्रवात — जब वायुदाब में अंतर पड़ने के कारण केन्द्र में निम्न दाब (Low) और चारों ओर उच्च दाब होता है, तो हवाएँ चक्राकार प्रतिरूप बनाती हैं, जिसे चक्रवात कहते हैं. चक्रवात में वायु के चलने की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सुइयों के विपरीत (Anticlockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सुइयों की दिशा (Clockwise) में होती है. विभिन्न क्षेत्रों में नाम: हरीकेन (कैरिबियन सागर व मैक्सिको), टाइफून (चीन, फिलीपींस, जापान), साइक्लोन (हिन्द महासागर), विली-विली (ऑस्ट्रेलिया), टॉरनेडो (दक्षिण एवं पूर्वी अमेरिका).
- प्रतिचक्रवात (Anti-Cyclone) — यह वृत्ताकार समदाब रेखाओं द्वारा घिरा हवा का ऐसा क्रम है जिसके केन्द्र में वायुदाब अधिक (High) होता है और बाहर की ओर घटता जाता है. इसमें हवाएँ केन्द्र से परिधि की ओर चलती हैं, तथा इनकी दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में क्लॉकवाइज व दक्षिणी गोलार्द्ध में एंटी-क्लॉकवाइज होती है.
भाग 4: जलमण्डल (Hydrosphere) — गर्त, धाराएँ एवं लवणता
भूमण्डल के लगभग 70.8% भाग पर जल है. दक्षिणी गोलार्द्ध में 84% जल और 16% स्थल तथा उत्तरी गोलार्द्ध में 40% जल और 60% स्थल भाग है.
1. महासागरीय गर्त (Oceanic Deeps)
| गर्त का नाम | महासागरीय अवस्थिति / स्थान | गहराई (मीटर में) |
|---|---|---|
| मेरियाना गर्त | उत्तरी प्रशान्त महासागर (गुआम द्वीप के समीप - विश्व का सबसे गहरा गर्त) | 11,033 मीटर |
| टोंगा गर्त | मध्य दक्षिण प्रशान्त महासागर | 10,882 मीटर |
| प्यूटोरिको गर्त | अटलांटिक महासागर (पश्चिमी द्वीप समूह) | 8,392 मीटर |
| सुण्डा गर्त / डायमेण्टिना | पूर्वी हिन्द महासागर / हिन्द महासागर के दक्षिण-पूर्व | 7,450 मीटर / 8,047 मीटर |
2. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents)
| प्रशान्त महासागरीय धाराएँ | प्रकृति / स्वरूप | अटलांटिक महासागरीय धाराएँ | प्रकृति / स्वरूप |
|---|---|---|---|
| उत्तरी विषुवतरेखीय जलधारा | गर्म | फ्लोरिडा धारा / गल्फ स्ट्रीम | गर्म |
| क्यूरोशियो जलधारा | गर्म | इरमिंगर धारा / ब्राजील धारा | गर्म |
| अलास्का की धारा / सुशिमा धारा | गर्म | लैब्राडोर धारा / कनारी धारा | ठंडी |
| क्यूराइल जलधारा / कैलिफ़ोर्निया धारा | ठंडी | फाकलैंड धारा / बेंगूएला धारा | ठंडी |
| हम्बोल्ट या पेरूवियन धारा | ठंडी | पूर्वी ग्रीनलैंड धारा | ठंडी |
* हिन्द महासागर की धाराओं में: उत्तरी हिन्द महासागर में ऋतुओं के अनुसार मानसूनी पवनों की दिशा बदलने से धाराओं की दिशा बदल जाती है. मोजाम्बिक धारा और अगुलहास धारा गर्म हैं, जबकि पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई धारा ठंडी प्रकृति की है.
3. महासागरीय लवणता (Salinity)
सागरीय जल के भार एवं उसमें घुले हुए पदार्थों के भार के अनुपात को सागरीय लवणता कहा जाता है, जिसे ग्राम प्रति हजार ग्राम (‰) के रूप में व्यक्त करते हैं. समुद्री जल की औसत लवणता लगभग 35‰ है.
- लवणों का घटता क्रम — सोडियम क्लोराइड (NaCl - 77.8%) > मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl2 - 10.9%) > मैग्नीशियम सल्फेट (MgSO4 - 4.7%) > कैल्शियम सल्फेट (CaSO4 - 3.6%).
- सर्वाधिक लवणता वाले क्षेत्र — कर्क तथा मकर रेखाओं के बीच (35° अक्षांश निकट) लवणता सबसे ज्यादा होती है. विश्व में सबसे ज्यादा लवणता **वान झील (टर्की) — 330‰**, मृत सागर (इजरायल, जॉर्डन) — 240‰, तथा साल्ट लेक (अमेरिका) — 220‰ में मिलती है. महासागरों में सर्वाधिक लवणता उत्तरी अटलांटिक महासागर के सारगैसो क्षेत्र (38%) में मिलती है. समान खारेपन वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समलवण रेखा (Isohaline) कहते हैं.
भाग 5: विश्व की 30 प्रमुख जलसन्धियाँ (Straits)
| क्र.सं. | जलसन्धि का नाम | सम्बद्ध जलीय स्थल / सागर | भौगोलिक स्थिति / देश |
|---|---|---|---|
| 1 | बेरिंग जलसन्धि | बेरिंग सागर एवं चुकसी सागर | अलास्का–रूस |
| 2 | फ्लोरिडा जलसन्धि | मैक्सिको की खाड़ी एवं अटलांटिक महासागर | सं.रा. अमेरिका–क्यूबा |
| 3 | डेविस जलसन्धि | बेफिन खाड़ी एवं अटलांटिक महासागर | ग्रीनलैंड–कनाडा |
| 4 | हडसन जलसन्धि | हडसन की खाड़ी एवं अटलांटिक महासागर | कनाडा |
| 5 | जिब्राल्टर जलसन्धि | भूमध्य सागर एवं अटलांटिक महासागर | स्पेन–मोरक्को |
| 6 | डोवर जलसन्धि | इंग्लिश चैनल एवं उत्तरी सागर | इंग्लैंड–फ्रांस |
| 7 | हारमुज जलसन्धि | फारस की खाड़ी एवं ओमान की खाड़ी | ओमान–ईरान |
| 8 | बाब-अल मंडेब | लाल सागर एवं अरब सागर | यमन–जिबूती |
| 9 | पाक जलसन्धि | मन्नार एवं बंगाल की खाड़ी | भारत–श्रीलंका |
| 10 | मलक्का जलसन्धि | अंडमान सागर एवं दक्षिणी चीन सागर | इंडोनेशिया–मलेशिया |
| 11 | सुंडा जलसन्धि | जावा सागर एवं हिन्द महासागर | इंडोनेशिया |
| 12 | मैगेलन जल सन्धि | प्रशान्त एवं दक्षिण अटलांटिक महासागर | चिली |
| 13 | टॉरेस जलसन्धि | आराफुरा सागर एवं पापुआ की खाड़ी | न्यूगिनी–ऑस्ट्रेलिया |
| 14 | बॉसफोरस जलसन्धि | काला सागर एवं मारमरा सागर | तुर्की |
| 15 | ओरांटो जलसन्धि | एड्रिएटिक सागर एवं आयोनियन सागर | इटली–अल्बानिया |