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विश्व की मृदा, वनस्पति, फसलें, जनजातियाँ व औद्योगिक स्थल

1 min read 39 views 06 Jul 2026 World Geography
कक्षा VI-XII NCERT सार संकलन पर आधारित विश्व की मृदाओं का वर्गीकरण (CSCS योजना), प्राकृतिक वनस्पति, फसलों की भौगोलिक परिस्थितियाँ, 55 प्रमुख जनजातियाँ, स्थलरूद्ध देश एवं औद्योगिक शहरों के उपनामों के विस्तृत नोट्स।
Table of Contents
  1. भाग 1: विश्व की मृदा (Soils) एवं प्राकृतिक वनस्पति
  2. 1. CSCS योजना के तहत् विश्व मृदाओं का वर्गीकरण
  3. 2. प्राकृतिक वनस्पति एवं वनों के प्रकार
  4. भाग 2: विश्व की प्रमुख फसलें एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ
  5. भाग 3: विश्व (विविध) — स्थलरूद्ध देश, नदियाँ एवं नहरें
  6. 1. स्थलरूद्ध देश (Landlocked Countries)
  7. 2. विश्व की प्रमुख नदियाँ एवं नहरें
  8. 3. विश्व के प्रमुख जलप्रपात (Waterfalls)
  9. भाग 4: विश्व की 55 प्रमुख जनजातियाँ एवं भौगोलिक क्षेत्र
  10. भाग 5: वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य, रेलमार्ग एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ
  11. 1. विश्व के प्रमुख औद्योगिक स्थल एवं विनिर्माण उद्योग
  12. 2. औद्योगिक शहरों के भौगोलिक उपनाम
  13. 3. विश्व के प्रमुख रेलमार्ग एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ
Key Points
  • विश्व मृदाओं के वर्गीकरण की CSCS योजना के अंतर्गत मिट्टी को 10 प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें वर्टीसॉल पानी मिलने पर फूलने और सूखने पर सिकुड़ने वाली कपास मिट्टी है।
  • दक्षिणी अमेरिका के अमेजन बेसिन में पाए जाने वाले अत्यधिक सघन उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों को स्थानीय रूप से 'सेल्वास' (Selvas) कहा जाता है।
  • समशीतोष्ण कोणधारी वनों को साइबेरियाई क्षेत्र में 'टैगा वनस्पति' के नाम से जाना जाता है, जिसमें चीड़, फर और स्प्रूस जैसे नर्म लकड़ी के वृक्ष मिलते हैं।
  • ब्राजील में कहवा (कॉफी) के बड़े बागानों को 'फैजेंडा' कहा जाता है, जबकि मक्का उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका की 'मक्का पेटी' है।
  • कजाकिस्तान विश्व का सबसे बड़ा स्थलरूद्ध (Landlocked) देश है, जबकि दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में केवल बोलीविया और पराग्वे ही स्थलरूद्ध देश हैं।
  • स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है जिसका निर्माण 1869 ई. में हुआ था, तथा सू नहर उत्तरी अमेरिका की सुपीरियर और ह्यूरन झीलों को आपस में मिलाती है।
  • वेनेजुएला में स्थित एंजिल जलप्रपात (979 मीटर) पूरे विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात माना जाता है।
  • उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों को 'रेड इंडियन' कहा जाता है, जबकि न्यूजीलैंड की प्रमुख मूल जनजाति 'माओरी' है।
  • जापान के नागोया शहर को 'जापान का मैनचेस्टर' तथा भारत के पीथमपुर को 'भारत का डेट्रॉइट' कहा जाता है।
  • 49वीं समानान्तर अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और कनाडा के बीच स्थित है, जबकि 38वीं समानान्तर रेखा उत्तरी और दक्षिणी कोरिया को विभक्त करती है।

भाग 1: विश्व की मृदा (Soils) एवं प्राकृतिक वनस्पति

मिट्टी कई ठोस, तरल और गैसीय पदार्थों का एक मिश्रण है। सिमनसन (1957) ने पैतृक शैलों, जलवायु तथा जैविक प्रतिक्रियाओं के आधार पर विभिन्न प्रकार के मृदा प्रकार बताए हैं, जिनमें पोडजोल, प्रक्षालित पेडोकैल (कैल्शियम युक्त) व पेडाल्फर मुख्य हैं।

1. CSCS योजना के तहत् विश्व मृदाओं का वर्गीकरण

CSCS योजना के अंतर्गत विश्व की समस्त मृदाओं को उच्चतम वर्ग की 10 श्रेणियों में विभक्त किया गया है, जिसका मुख्य आधार मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile), संस्तर (Horizon), तथा कैटायन विनिमय क्षमता (CEC) है:

  1. एंटीसॉल (Entisols) — इस मृदा का विकास पूर्णरूपेण नहीं होता है और इसी कारण संस्तरों का इसमें अभाव होता है। यह मृदा सहारा, कनाडा के पर्वतीय क्षेत्र, अलास्का, साइबेरिया तथा तिब्बत में पाई जाती है।
  2. वर्टीसॉल (Vertisols) — यह मृदा पानी के मिलाने जाने पर फेल जाती है और सूखने पर सिकुड़ जाती है, जिससे इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं। यह मुख्यतः उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्ण घास के मैदानों (काली मृदा / रेगुर / कपास मृदा) में मिलती है। यह भारत, अमेरिका, सूडान और ऑस्ट्रेलिया में विस्तृत है।
  3. एरिडोसॉल (Aridisols) — इस प्रकार की मृदा में अवक्षालन नहीं होता, जैविक पदार्थ अत्यंत न्यून होते हैं और क्षारों की प्रचुरता होती है। यह मूलतः रेगिस्तानी मृदा है जो सहारा, मध्य मैक्सिको व ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती है।
  4. मोलिसॉल (Mollisols) — यह मृदा मुलायम तथा भुरभुरी होती है। इसमें ऊपरी गहरे काले रंग के संस्तर का निर्माण होता है। यह मुख्यतः प्रेअरी क्षेत्र की मिट्टी है जो अमेरिका, चीन, मंगोलिया व अर्जेन्टीना में मिलती है।
  5. इनसेप्टीसॉल (Inceptisols) — यह नवीन मृदा है, जिसके संस्तर अल्पविकसित अवस्था में होते हैं तथा अवक्षालन व अपक्षयन की तीव्रता भी कम होती है। यह भारत के गंगा घाटी, चीन व कोलम्विया में पाई जाती है।
  6. अन्य प्रमुख श्रेणियाँ — स्पोडोसॉल (सिलिकेट प्रधान, उत्तरी अमेरिका), अल्फीसॉल (मध्यम व उच्च क्षारीय उर्वरक मृदा), अल्टीसॉल (अपक्षयित अम्लीय मृदा - दक्षिण अमेरिका व पूर्वी एशिया), आक्सीसॉल (अत्यधिक अवक्षालित व अपक्षयित मृदा - ब्राजील व मध्य अफ्रीका) तथा हिस्टोसॉल (निम्न अक्षांशों की जैविक तत्वों से युक्त अम्लीय मृदा)।

2. प्राकृतिक वनस्पति एवं वनों के प्रकार

वन पौधा समुदाय जो लंबे समय तक बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के उगता है, उसे प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं। वनों के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • विषुवत रेखीय उष्ण आर्द्र या सदाबहार वन — ये वन विषुवत रेखा के दोनों ओर 5° उत्तर और 5° दक्षिण अक्षांशों के मध्य पाए जाते हैं, जहाँ सदैव ऊँचे तापमान और साल भर भारी वर्षा होती है। दक्षिणी अमेरिका के अमेजन बेसिन में इन वनों को सेल्वास (Selvas) कहा जाता है। इन वनों में महोगनी, आबनूस, सागौन, बाँस, रोजवुड, सिनकोना (जिससे कुनैन दवा बनती है) तथा रबड़ आदि वृक्ष उगते हैं। इन वनों का सर्वाधिक 55% विस्तार दक्षिणी अमेरिका में है।
  • उष्ण कटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले पर्णपाती या मानसून वन — ये वन भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5° से 30° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांशों के मध्य पाए जाते हैं। इन्हें पतझड़ (Deciduous) वन भी कहते हैं। आर्थिक दृष्टि से ये बहुमूल्य वृक्ष हैं, जैसे— साल, शीशम, सागवान, आम, महुआ, बाँस, नीम, देवदार आदि।
  • समशीतोष्ण कोणधारी (शंकुल) वन / टैगा वन — ये वन 50° से 70° उत्तरी अक्षांशों के बीच उत्तरी अमेरिका और यूरीशिया के उत्तरी भागों में विस्तृत पट्टी के रूप में मिलते हैं। साइबेरिया में इन्हें टैगा वनस्पति के नाम से जाना जाता है। समुद्र तल से 1,500 से 2,000 मीटर तक की ऊँचे पर्वतीय भागों में भी ये पाए जाते हैं। इनमें नर्म लकड़ी के वृक्ष— चीड़, फर, स्प्रूस, हेमलॉक, बर्क, सीडर, साइप्रस, डगलस फर, ब्लू पाइन आदि उगते हैं।

भाग 2: विश्व की प्रमुख फसलें एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ

विश्व की कृषि फसलों को मुख्य रूप से खाद्यान्न, व्यापारिक और बागानी फसलों में वर्गीकृत किया जाता है:

फसल का नाम व वर्ग आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियाँ (तापमान व वर्षा) प्रमुख उत्पादक क्षेत्र व वैश्विक स्थिति
1. गेहूँ (शीतोष्ण खाद्यान्न) तापमान: न्यूनतम 10°C तथा अधिकतम 25°C; 90 दिन पाला रहित मौसम। वर्षा: 50–80 सेमी। मृदा: हल्की दोमट या भारी दोमट (ह्यूमस युक्त काली मृदा सर्वोत्तम)। सं.रा. अमेरिका (उ. व द. डकोटा, कन्सास), पूर्व सोवियत संघ (यूक्रेन का काली मिट्टी क्षेत्र, वोल्गा बेसिन), चीन (ह्वांगहो घाटी), भारत (उत्तरी भारत का विशाल मैदान)।
2. चावल (उष्ण खाद्यान्न) तापमान: 20°C–27°C तक। वर्षा: 120–200 सेमी (पानी से भरे खेत आवश्यक)। सस्ते श्रम की अधिक आवश्यकता। चीन (सीक्यांग व यांग्टीसीक्यांग घाटी - प्रथम), भारत (प. बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब), इण्डोनेशिया (जावा, सुमात्रा), बांग्लादेश।
3. मक्का (उष्ण-कम उपोष्ण) तापमान: 18°C–27°C तक (तेज धूप व पाला रहित 40 दिन)। वर्षा: 50–125 सेमी। मृदा: चिकनी दोमट व कांप मिट्टी। सं.रा. अमेरिका (पेन्सिलवेनिया, केंटुकी - मक्का पेटी), चीन (जेचवान बेसिन), ब्राजील (मिनास गिरास)।
4. गन्ना (उष्ण-आर्द्र व्यापारिक) तापमान: 21°C–27°C तक। वर्षा: 75–150 सेमी। मृदा: गहरी दोमट, चिकनी तथा जलोढ़। उर्वरक: अमोनिया सल्फेट व सुपर फॉस्फेट। ब्राजील (उत्तरी-पूर्वी तटीय भाग), भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र), क्यूबा (मध्य व पश्चिमी क्षेत्र)।
5. कपास (उष्ण व्यापारिक) तापमान: 20°C–35°C तक। वर्षा: 50–100 सेमी; 200 पाला रहित दिन आवश्यक। मृदा: काली मिट्टी (रेगुर) व चूना-फॉस्फेट युक्त दोमट। चीन (मध्य-पूर्वी क्षेत्र, यांग्टीसीक्यांग घाटी), सं.रा. अमेरिका (कपास पेटी), भारत (महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब)।
6. कहवा / कॉफी (बागानी) तापमान: 15°C–25°C तक (तेज धूप से बचाव हेतु छाँयादार वृक्ष आवश्यक)। वर्षा: 150–250 सेमी। मृदा: लावायुक्त या लाल मिट्टी। ब्राजील (यहाँ कहवा के बागान को 'फैजेंडा' कहा जाता है - प्रथम), कोलम्विया (काउका घाटी)।
7. चाय (उष्ण बागानी) तापमान: 21°C–30°C तक। वर्षा: 200–300 सेमी (पहाड़ी ढाल आवश्यक ताकि जड़ में पानी न रुके)। मृदा: हल्की बलुई दोमट (पोटाश व लौह युक्त)। भारत (असोम की घाटी, प. बंगाल के दार्जीलिंग), चीन (यांग्टीसीक्यांग घाटी के दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी भाग), श्रीलंका (केन्डी)।

भाग 3: विश्व (विविध) — स्थलरूद्ध देश, नदियाँ एवं नहरें

1. स्थलरूद्ध देश (Landlocked Countries)

किसी देश का कोई भाग यदि सागर तट से जुड़ा न हो अर्थात् चारों ओर अन्य देशों से घिरा हो तो उसको स्थलरूद्ध देश कहते हैं। विश्व में कुल 46 स्थलरूद्ध देश हैं, जिनका महाद्वीपवार विवरण निम्न प्रकार है:

  • अफ्रीका (16 देश) — बुरुण्डी, बुर्किना फासो, बोत्सवाना, मध्य अफ्रीकी गणतंत्र, चाड, रवाण्डा, इथियोपिया, लेसोथो, मलावी, माली, दक्षिण सूडान, नाइजर, स्वाजीलैंड, युगाण्डा, जाम्बिया, जिम्बाब्वे।
  • एशिया (12 देश) — अफगानिस्तान, भूटान, कजाकिस्तान (विश्व का सबसे बड़ा स्थलरूद्ध देश), किर्गिस्तान, लाओस, उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, नेपाल, मंगोलिया, अजरबैजान, आर्मेनिया।
  • यूरोप (18 देश) & दक्षिण अमेरिका (02 देश) — यूरोप में ऑस्ट्रिया, बेलारूस, चेक गणराज्य, हंगरी, लक्ज़मबर्ग, स्विट्ज़रलैंड, वैटिकन सिटी (सबसे छोटा) आदि। दक्षिण अमेरिका में केवल बोलीविया व पराग्वे स्थलरूद्ध देश हैं।

2. विश्व की प्रमुख नदियाँ एवं नहरें

  • सीमा बनाने वाली नदियाँ — रियो ग्रैंडे (मैक्सिको-अमेरिका), आमूर (चीन-रूस), लिम्पोपो (बोत्सवाना व जिम्बाब्वे), जाम्बेजी (जाम्बिया व जिम्बाब्वे), ऑरेंज (द. अफ्रीका एवं नामीबिया) तथा डैन्यूब (रोमानिया एवं बुल्गारिया)।
  • विश्व की लम्बी नदियाँ — नील (उद्गम: विक्टोरिया झील, लम्बाई: 6650 किमी), अमेजन (उद्गम: एण्डीज पर्वत, लम्बाई: 6428 किमी), यांगत्सी क्याँग (तिब्बत पठार, 6300 किमी) तथा मिसिसिपी-मिसौरी (अमेरिका, 6275 किमी)। कांगो नदी (4700 किमी) अटलांटिक महासागर में गिरती है तथा लीना नदी (4400 किमी) लाप्टेव सागर में गिरती है।
  • विश्व की प्रमुख नहरें (Straits/Canals)
    • सू नहर (USA) — सुपीरियर झील को ह्यूरन झील से जोड़ती है।
    • कील नहर (जर्मनी) — उत्तरी सागर और बाल्टिक सागर के बीच स्थित है।
    • स्वेज नहर (मिस्र) — लाल सागर एवं भूमध्य सागर के बीच (निर्माण: 1869 ई., लम्बाई: 168 किमी), यह विश्व की सबसे बड़ी जहाजरानी नहर है।
    • पनामा नहर (पनामा) — कैरिबियन सागर और प्रशान्त महासागर के मध्य (निर्माण: 1914 ई.)।

3. विश्व के प्रमुख जलप्रपात (Waterfalls)

  • एंजिल प्रपात — वेनेजुएला में स्थित विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात (979 मीटर) है।
  • योसेमाइट व टुगेला — कैलिफ़ोर्निया (739 मीटर) / दक्षिण अफ्रीका (614 मीटर)।
  • नियाग्रा प्रपात — यह यूएसए/कनाडा की सीमा पर ईरी एवं ओण्टेरियो झीलों के मध्य स्थित है (120 मीटर)। जोग प्रपात भारत (255 मीटर) में स्थित है।

भाग 4: विश्व की 55 प्रमुख जनजातियाँ एवं भौगोलिक क्षेत्र

वैश्विक स्तर पर विशिष्ट सांस्कृतिक व भौगोलिक क्षेत्रों में निवास करने वाली प्रमुख जनजातियों की संपूर्ण सूची निम्न प्रकार है:

क्र.सं. जनजाति का नाम मुख्य निवास क्षेत्र / भौगोलिक अवस्थिति क्र.सं. जनजाति का नाम मुख्य निवास क्षेत्र / भौगोलिक अवस्थिति
1 कुलामैन दक्षिण मिंडनाओ (फिलीपींस) के मूल निवासी। 2 कुर्व / लाई इरान, इराक (पशुपालक कृषक) / म्याँमार की चिन पहाड़ियाँ।
3 लैप्स स्कैंडिनेविया व कोला प्रायद्वीप (रेंडियर पालन)। 4 माओरी / यांकी न्यूजीलैंड के मूल निवासी / संयुक्त राज्य अमेरिका।
5 यूमा / युइत एरीजोना, कैलिफ़ोर्निया / साइबेरिया व अलास्का। 6 जुलू / जेमी दक्षिण अफ्रीका (नेटाल प्रान्त) / असम तथा म्याँमार सीमा।
7 नॉर्डिक नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड व आइसलैंड। 8 पापुअन / पोकोमा पापुआ के मूल निवासी / अफ्रीका (कीनिया)।
9 समोयेड तैय्मूर प्रायद्वीप, श्वेत सागर व उत्तरी सागर तट। 10 शान / बंटू दक्षिण चीन, म्याँमार व थाईलैंड / भूमध्यरेखीय व द. अफ्रीका।
11 एबोरिजिन / अचुआ ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी / बेल्जियम कांगो के पिग्मी। 12 ऐनू / बेजा जापान के मूल निवासी / नील नदी घाटी के खानाबदोश।
13 बरबर / ब्लैक फेलो उत्तरी अफ्रीका (त्रिपोली के पश्चिम) / ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी। 14 बोरो / बरयाट्स दक्षिण-पूर्व कोलम्बिया व ब्राजील / मध्य एशिया।
15 चुकची / दयाक साइबेरियाई अमेरिकी (चुकची प्रायद्वीप) / बोर्नियो के वनों में। 16 फेलाह / फिन मिस्र (नील नदी घाटी) के खेतिहर मजदूर / फिनलैंड व पम्पास।
17 फूला / गबोन अफ्रीकी नीग्रो व काकेशस मिश्रण / गैबन राज्य के नीग्रो। 18 हैडा / स्वाहीली ब्रिटिश कोलम्बिया व प्रिंस ऑफ वेल्स द्वीप / जंजीबार तट।
19 तातार / टुंगस साइबेरिया के निवासी / पूर्वी साइबेरिया के यायावर। 20 उइगर / वेददा तारिम बेसिन के नखलिस्तान / श्रीलंका के मूल निवासी।
21 जिंका / याकूत अफ्रीका के केप प्रांत के जुलू / उत्तरी पूर्वी साइबेरिया के चरवाहे।
22 माया मध्य अमेरिका के आदिवासी (मैक्सिको, ग्वाटेमाला व होंडुरास)।
23 रेड इंडियन उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी (मंगोलायड प्रजाति, कोलम्बस द्वारा नामकरण)।
24 ऐशंती / वाटवा घाना के ऐशांती पठार के निवासी / अफ्रीका के कंचाई प्रदेश के पिग्मी।
25 हन / होपी चीन के मूल निवासी / संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तर-पूर्वी एरीजोना के आदिवासी।
26 हो / होटेनटॉट संयुक्त राज्य अमेरिका के ओलम्पिक प्रायद्वीप / दक्षिण अफ्रीका के बुशमैन सदृश लोग।
27 इंका / इन्यूत दक्षिणी अमेरिका के पेरू की कुलको घाटी / उत्तरी अमेरिका के एस्किमो।
28 काफिर / कैमसिन दक्षिण अफ्रीका के घास मैदान के निवासी / साइबेरिया के यैसेनी नदी के ऊपरी भाग।
29 कम्वा / कराकल्पक मध्य कीनिया के बंटू / अरल सागर के समीप रहने वाली तुर्क जनजाति।
30 कुबु सुमात्रा की आदिम जनजाति।

भाग 5: वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य, रेलमार्ग एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ

1. विश्व के प्रमुख औद्योगिक स्थल एवं विनिर्माण उद्योग

देश का नाम प्रमुख औद्योगिक स्थल / नगर विशिष्ट विनिर्माण उद्योग
कनाडा मॉन्ट्रियल, क्यूबेक / ओटावा हैमिल्टन जलपोत व एयरक्राफ्ट, मेरिजन इंजीनियरिंग / कागज उद्योग, लौह इस्पात।
सं.रा. अमेरिका डेट्रॉइट / शिकागो / लॉस एंजिल्स / सैन-फ्रांसिस्को मोटर-कार (ऑटोमोबाइल) / माँस प्रसंस्करण / फिल्म (हॉलीवुड) व एयरक्राफ्ट / सिलिकन वैली (तेल शोधन, कंप्यूटर व एल्यूमिनियम)।
ब्रिटेन / फ्रांस मैनचेस्टर / लंडन डर्बीशायर // शैम्पेन व बोर्डो सूती वस्त्र, जलपोत / इंजीनियरिंग व परिवहन // शराब उद्योग।
जर्मनी / रूस डॉर्टमुंड, फ्रैंकफर्ट // मास्को, लेनिनग्राद लौह-इस्पात व रसायन इंजीनियरिंग // लौह-इस्पात, रसायन, जलपोत, वस्त्र उद्योग।
जापान / चीन नागोया (जापान का मैनचेस्टर), ओसाका // शंघाई, वुहान एयरक्राफ्ट, कार, मशीनरी, जलपोत, लौह-इस्पात // सूती वस्त्र, मशीन जलपोत, लौह-इस्पात।

2. औद्योगिक शहरों के भौगोलिक उपनाम

विश्व के कई प्रमुख औद्योगिक नगरों को उनकी उत्पादन विशिष्टता के कारण विशिष्ट उपनाम दिए गए हैं:

क्र.सं. औद्योगिक शहर भौगोलिक उपनाम / संज्ञा क्र.सं. औद्योगिक शहर भौगोलिक उपनाम / संज्ञा
1 गोर्की रूस का डेट्रॉइट 2 पीथमपुर भारत का डेट्रॉइट
3 शंघाई चीन का मैनचेस्टर 4 ओसाका जापान का मैनचेस्टर
5 कोयम्बटूर दक्षिण भारत का मैनचेस्टर 6 पिट्सबर्ग विश्व के इस्पात की नगरी
7 टूल / हैमिल्टन रूस का पिट्सबर्ग / कनाडा का बर्मिंघम 8 अहमदाबाद / तुरिन भारत का मैनचेस्टर / इटली का डेट्रॉइट
9 विंडसर / मिलान कनाडा का डेट्रॉइट / इटली का मैनचेस्टर 10 कानपुर / जमशेदपुर उत्तर भारत का मैनचेस्टर / भारत का पिट्सबर्ग

3. विश्व के प्रमुख रेलमार्ग एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ

  • ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग — यह विश्व का सबसे लंबा रेलमार्ग है जो संत पीटर्सबर्ग को व्लाडीवोस्टक स्टेशन से जोड़ता है।
  • कनाडियन पैसिफिक रेलमार्ग — हैलीफैक्स स्टेशन को वैंकूवर से जोड़ता है। ट्रांस ऑस्ट्रेलियन रेलमार्ग सिडनी को पर्थ से जोड़ता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखाएँ:
    • मैकमोहन रेखा — भारत एवं चीन के मध्य।
    • डूरंड रेखा — पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के मध्य।
    • रेडक्लिफ रेखा — भारत एवं पाकिस्तान के मध्य।
    • हिंडनबर्ग रेखा — जर्मनी एवं पोलैंड के मध्य।
    • मैगीनॉट रेखा — जर्मनी एवं फ्रांस के मध्य।
    • 38वीं समानान्तर रेखा — उत्तरी एवं दक्षिणी कोरिया के मध्य।
    • 49वीं समानान्तर रेखा — यूएसए एवं कनाडा के मध्य।
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